अमृतसर , जून 16 -- पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता और सिख विचारक प्रो. सरचंद सिंह ख्याला ने मंगलवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य की हर मां अपने बच्चे को बचपन से ही यह सिखाती है कि गुरु घर के खिलाफ कोई अपराध न करे, लेकिन यह बेहद दुखद है कि पंजाब के मुख्यमंत्री को गुरु और पंथ के विरुद्ध आचरण करने वाला बताया गया है।
प्रो ख्याला ने मुख्यमंत्री से अपील की कि वह सिखों के सर्वोच्च धार्मिक तख्त के खिलाफ टकराव वाला रुख न अपनायें। उन्होंने दावा किया कि कथित वीडियो, जिसमें 10 सिख गुरुओं के चित्रों के अपमान का आरोप है, की फॉरेंसिक जांच से पुष्टि होने के बाद सिख समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं। उनका कहना था कि श्री अकाल तख्त साहिब के पांच सिंह साहिबानों द्वारा दिये गये आदेश के बाद श्री मान को पंथ विरोधी गतिविधियों में शामिल माना गया है, जैसा कि पहले कुछ अन्य मामलों में भी पंथिक फैसले लिए जा चुके हैं।
उन्होंने 1978 के निरंकारी मामले, 1998 के प्यारा सिंह भानियारा प्रकरण और 2007 में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री 15 जनवरी को श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होकर अपनी गलती स्वीकार कर लेते और माफी मांग लेते, तो यह स्थिति टाली जा सकती थी।
इसके साथ ही उन्होंने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि वीडियो फर्जी था, तो समय रहते निष्पक्ष फॉरेंसिक जांच कराई जानी चाहिए थी। उन्होंने राज्य में बेरोजगारी, नशा, गैंगस्टरवाद और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी चिंता जतायी। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में मर्यादा और संस्थाओं का सम्मान जरूरी है, और बिना ठोस सबूत के सिख धर्म की सर्वोच्च संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाना पंजाब में सामाजिक सौहार्द के लिए ठीक नहीं है।
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