भोपाल , अक्टूबर 23 -- वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (वीआईटी) भोपाल के नाम और वास्तविक स्थान को लेकर उठी शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मध्यप्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से चार सप्ताह के भीतर अतिरिक्त रिपोर्ट और कार्रवाई प्रतिवेदन मांगा है। रिपोर्ट प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 29 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है।
राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई) के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार की शिकायत में आरोप लगाया गया था कि विश्वविद्यालय के नाम में भोपाल का उल्लेख होने से विद्यार्थियों और अभिभावकों को उसके वास्तविक स्थान को लेकर भ्रम हो सकता है, जबकि इसका परिसर सीहोर जिले के कोठरी कलां में भोपाल-इंदौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है। शिकायत में विश्वविद्यालय के नाम और वास्तविक स्थान के बीच दूरी का हवाला देते हुए प्रवेश संबंधी जानकारी में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई थी।
आयोग ने 22 अक्टूबर 2026 की कार्यवाही में राज्य सरकार की रिपोर्ट पर विचार करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का नाम राज्य विधानमंडल द्वारा निर्धारित होना अपने आप में इस सवाल का जवाब नहीं है कि विद्यार्थियों को उसके वास्तविक स्थान की स्पष्ट जानकारी दी जा रही है या नहीं। आयोग ने विश्वविद्यालय के प्रॉस्पेक्टस, आधिकारिक वेबसाइट और विज्ञापनों में स्थान का उल्लेख किस तरह किया जाता है, इसकी जांच के संबंध में भी स्पष्टीकरण मांगा है।
शिकायत में विश्वविद्यालय परिसर में कथित अनधिकृत क्लिनिक के संचालन और पूर्व में अशांति की घटनाओं से जुड़े आरोप भी उठाए गए थे। आयोग ने उल्लेख किया कि राज्य सरकार की रिपोर्ट में इन पहलुओं की जांच का स्पष्ट विवरण नहीं है। इन आरोपों पर अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया गया है।
आयोग ने राज्य सरकार के दस्तावेजों में राजपत्र अधिसूचना की तारीख को लेकर भी स्पष्टीकरण मांगा है। विभागीय पत्र में 24 अगस्त 2017 की अधिसूचना का उल्लेख किया गया, जबकि संलग्न दस्तावेज 13 जून 2017 का मध्यप्रदेश असाधारण राजपत्र था। आयोग ने दोनों दस्तावेजों के संबंध और संबंधित अधिसूचना के विवरण को स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।
आयोग के अनुसार, 30 मार्च और 5 जून 2026 को निर्देश जारी किए जाने के बावजूद यूजीसी की ओर से जवाब प्राप्त नहीं हुआ था। आयोग ने विश्वविद्यालयों के विज्ञापनों के नियमन और शैक्षणिक मानकों से संबंधित विषयों में यूजीसी की भूमिका का उल्लेख करते हुए उसके अध्यक्ष से भी कार्रवाई प्रतिवेदन मांगा है। मध्यप्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को भी अतिरिक्त रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
रवि परमार ने मांग की है कि विद्यार्थियों और अभिभावकों को विश्वविद्यालय के वास्तविक स्थान, सुविधाओं और प्रवेश संबंधी जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने परिसर में कथित अनधिकृत क्लिनिक और अशांति से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की है। अब मामले में राज्य सरकार और यूजीसी की ओर से 29 नवंबर तक प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब पर निगाहें रहेंगी।
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