दरभंगा , अगस्त 05 -- िश्व स्तनपान सप्ताह के पांचवें दिन दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (डीएमसीएच)के मातृ-शिशु अस्पताल भवन में स्तनपान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने प्रसूता माताओं और उनके परिजनों से संवाद कर स्तनपान के लाभ, सामान्य कठिनाइयों तथा उनके व्यावहारिक समाधान की जानकारी दी। इसके बाद चिकित्सकों और नर्सों ने जागरूकता रैली निकाली।
कार्यक्रम का आयोजन प्राचार्य डॉ. यू.सी. झा, अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्र, सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. अमित कुमार तथा स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. पूजा महासेठ के नेतृत्व में आईएपी, फॉग्सी और एनएनएफ की दरभंगा शाखाओं द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
चिकित्सकों ने बताया कि जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू करने से दूध बनने और पिलाने की प्रक्रिया सुचारु होती है। जन्म के बाद निकलने वाला गाढ़ा पीला दूध कोलेस्ट्रम या खीस नवजात के लिए पहला प्राकृतिक सुरक्षा कवच है। माताओं को बच्चे को सही स्थिति में पकड़ने, शरीर से सटाकर रखने, स्तन से सही जुड़ाव कराने और प्रभावी ढंग से दूध पिलाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
विशेषज्ञों ने समझाया कि बच्चे को एक स्तन से पर्याप्त समय तक दूध पीने देना चाहिए, क्योंकि दूध की संरचना पान के दौरान बदलती है और बाद में मिलने वाला दूध वसा एवं ऊर्जा से अधिक समृद्ध होता है।
वैज्ञानिक संगोष्ठी के संयोजक वरिष्ठ चिकित्सक डॉ.ओम प्रकाश ने वैज्ञानिक संगोष्ठी के दौरान कहा कि आधुनिक नवजात देखभाल में मां और शिशु को अनावश्यक रूप से अलग नहीं करने की नीति अपनाई जा रही है। जन्म के तुरंत बाद मां की छाती पर शिशु को रखने और त्वचा से त्वचा का संपर्क कराने से दोनों का तनाव कम होता है। स्तनपान के दौरान निकलने वाले ऑक्सीटोसिन और प्रोलैक्टिन मां-शिशु के भावनात्मक जुड़ाव तथा दूध बनने और निकलने की प्रक्रिया में सहायता करते हैं।उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्वस्थ नवजात को जन्म के पहले घंटे में स्तनपान कराया जाना चाहिए, छह महीने तक केवल मां का दूध दिया जाना चाहिए।इस दौरान पानी भी नहीं देना है और छह महीने के बाद उचित पूरक आहार के साथ स्तनपान दो वर्ष या उससे आगे तक जारी रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह संदेश विश्व स्वास्थ्य संगठन की अनुशंसाओं के अनुरूप हैं। यद्यपि विश्व स्तन पान सप्ताह एक उत्सव की तरह मनाया जाता है, लेकिन पूरे स्वास्थ्य-तंत्र में साल भर स्तनपान सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता है। स्तनपान शिशु के शारीरिक एवं मानसिक विकास के साथ-साथ मां और बच्चे के बीच भावनात्मक जुड़ाव को भी मजबूत करता है।
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