लखनऊ , मार्च 17 -- उत्तर प्रदेश में वायु गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। विश्व बैंक, केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण समझौते (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते के तहत उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंधन कार्यक्रम को लगभग 299.66 मिलियन अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
यह कार्यक्रम परिवहन, कृषि और उद्योग जैसे प्रमुख क्षेत्रों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एकीकृत समाधान लागू करेगा। इसका लाभ न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि आसपास के राज्यों को भी मिलेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन को ध्यान में रखते हुए इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया। एमओयू पर प्रदेश सरकार की ओर से बी. चंद्रकला, भारत सरकार की ओर से जूही मुखर्जी और विश्व बैंक की ओर से भारत के कार्यवाहक कंट्री डायरेक्टर पॉल प्रोसी ने हस्ताक्षर किए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। इस कार्यक्रम के माध्यम से विकास को केवल जीडीपी से नहीं, बल्कि स्वच्छ वातावरण, स्वस्थ नागरिकों और सतत विकास के आधार पर भी आंका जाएगा।
विश्व बैंक के प्रतिनिधि पॉल प्रोसी के अनुसार, इस पहल से परिवहन और एमएसएमई क्षेत्रों में लगभग 150 मिलियन डॉलर की निजी पूंजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा। इसके तहत इलेक्ट्रिक बसों और तीन-पहिया वाहनों को बढ़ावा देने के साथ-साथ उद्योगों में उत्सर्जन निगरानी और स्वच्छ तकनीकों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा।
कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के लगभग 39 लाख घरों को स्वच्छ ईंधन आधारित खाना पकाने की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा 700 से अधिक ईंट भट्ठों को आधुनिक और संसाधन-कुशल तकनीकों से जोड़ा जाएगा। किसानों को भी उर्वरकों के कुशल उपयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिससे उनकी उत्पादकता में वृद्धि होगी।
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