पटना, मार्च 24 -- विश्व टीबी दिवस के अवसर पर मंगलवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग की ओर से मरीज केंद्रित जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम केवल बीमारी के बारे में बताने तक सीमित नहीं रहा बल्कि मरीजों को यह भरोसा दिलाने का प्रयास था कि वे इस लड़ाई में अकेले नहीं हैं।
कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. दीपेन्द्र कुमार राय ने मरीजों से सीधे संवाद करते हुए कहा कि टीबी एक बीमारी जरूर है लेकिन यह आपकी पहचान नहीं है। सही समय पर जांच और पूरा इलाज इसे पूरी तरह हराया जा सकता है। उन्होंने मरीजों को सरल शब्दों में समझाया कि यदि लगातार खांसी, बुखार, वजन कम होना या रात में पसीना आना जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे नजरअंदाज न करें। समय पर की गई बलगम जांच और आधुनिक टेस्ट से टीबी का पता जल्दी और सटीक लगाया जा सकता है।
डॉ. राय ने उपचार को "धैर्य और अनुशासन की साझी यात्रा" बताते हुए कहा कि कम से कम छह महीने तक नियमित दवा लेना जरूरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बीच में दवा छोड़ना बीमारी को और जटिल बना सकता है और ड्रग रेसिस्टेंट टीबी का खतरा बढ़ा देता है।मरीजों के मन से डर और आर्थिक चिंता दूर करते हुए उन्होंने आश्वस्त किया कि टीबी का पूरा इलाज सरकार द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही निक्षय पोषण योजना के तहत हर मरीज को प्रति माह 500 रूपये की सहायता दी जाती है, जिससे वे पौष्टिक आहार लेकर जल्दी स्वस्थ हो सकें।
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