बैतूल , अगस्त 09 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में रविवार को विश्व आदिवासी दिवस उत्साह और सामाजिक एकता के संदेश के साथ मनाया गया। जिला मुख्यालय बैतूल के साथ मुलताई, प्रभातपट्टन, आमला, घोड़ाडोंगरी, शाहपुर, चिचोली, भीमपुर, भैंसदेही और आठनेर सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों में आदिवासी समाज की ओर से विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। आयोजनों में आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक अधिकारों के संरक्षण पर जोर दिया गया।

जिला मुख्यालय बैतूल में कार्यक्रमों की शुरुआत जिला अस्पताल से हुई। समस्त आदिवासी समाज संगठन के तत्वावधान में समाज के प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने अस्पताल में भर्ती मरीजों को फल वितरित किए। इसके बाद सुबह करीब 11 बजे सदर क्षेत्र स्थित पड़ापेन ठाना रैन बसेरा से रैली निकाली गई। रैली में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए।

रैली शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए आदिवासी मंगल भवन पहुंची, जहां विश्व आदिवासी दिवस का मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपराओं, अधिकारों और सामाजिक एकता को लेकर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ नई पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ना जरूरी है।

आदिवासी समाज संगठन के संदीप धुर्वे ने कहा कि आयोजन का उद्देश्य समाज की संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करना तथा लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने बताया कि जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भी विश्व आदिवासी दिवस उत्साह के साथ मनाया गया। मुख्य कार्यक्रम के बाद आदिवासी मंगल भवन में सामूहिक भोजन प्रसादी का आयोजन किया गया।

मुलताई में भी विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासी समाज की ओर से रैली निकाली गई। मुलताई और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में समाजजन कृषि उपज मंडी परिसर में एकत्र हुए। दोपहर करीब 12 बजे रैली शुरू होने से पहले सभी समाजजन अंबेडकर चौक पहुंचे। यहां संविधान निर्माता डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई।

इसके बाद डीजे की धुन के साथ रैली नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई बैतूल रोड स्थित अरिहंत लॉन पहुंची। रैली में युवा, महिलाएं और समाज के वरिष्ठजन शामिल हुए। बड़ी संख्या में लोग पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में पहुंचे। हल्की बारिश के बावजूद युवाओं का उत्साह कम नहीं हुआ और वे डीजे की धुन पर रैली में आगे बढ़ते रहे।

रैली के दौरान सामाजिक सौहार्द की मिसाल भी देखने को मिली। सेन समाज की ओर से प्रभाकर बोरकर और उनके साथियों ने पुष्पवर्षा कर रैली में शामिल आदिवासी समाजजनों का स्वागत किया। अरिहंत लॉन में मंचीय और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें लोककला, आदिवासी परंपराओं और युवाओं की प्रतिभा की प्रस्तुतियां दी गईं। कार्यक्रम के दौरान समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। रैली और कार्यक्रमों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा।

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