नारायणपुर , अगस्त 09 -- जल, जंगल और जमीन की रक्षा के संकल्प के साथ रविवार को छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के छोटेडोंगर में विश्व आदिवासी दिवस धूमधाम और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन 84 परगना सर्व आदिवासी समाज की ओर से किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत अमर शहीदों को नमन के साथ हुई। साप्ताहिक बाजार स्थल पर अमर शहीदों के छायाचित्र पर पूजा-अर्चना और ध्वजारोहण के बाद सैकड़ों लोगों ने रैली निकाली। पारंपरिक वेशभूषा, मांदर की थाप और लोकनृत्य के साथ निकली रैली ने पूरे छोटेडोंगर को आदिवासी संस्कृति के रंग में रंग दिया।
रैली में पुरुष पारंपरिक सफेद वेशभूषा में नजर आए। सिर पर मोरपंख और सींग से सजे मुकुट तथा हाथों में पारंपरिक सांस्कृतिक प्रतीक लेकर वे मांदर की थाप पर थिरकते हुए आगे बढ़े। महिलाओं ने भी पारंपरिक साड़ियों में सजकर बड़ी संख्या में रैली में हिस्सा लिया।
मुख्य सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान समाज के पदाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों का तिलक एवं पगड़ी पहनाकर सम्मान किया गया। इसके बाद आदिवासी युवक-युवतियों ने पारंपरिक डांडा और गोंडी नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियां दीं।
मांदर और ढोल की गूंज के बीच सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। कलाकारों की प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और जल, जंगल एवं जमीन के संरक्षण के संकल्प को प्रमुखता से रेखांकित किया गया।
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