भरतपुर , जुलाई 30 -- राजस्थान में मानसून की बेरुखी और पांचना बांध से पानी नहीं मिलने की वजह से जल की भीषण समस्या से जूझ रहे भरतपुर के विश्वविख्यात केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में बड़ी संख्या में जलीय जंतुओं के दम तोड़ देने से हाहाकार मच गया है।

पानी के अभाव में सूखी पड़ी झीलों में हजारो मछलियां के मर जाने एवं बिना पानी के तड़पते कछुओं को देखने के साथ उद्यान की सूखी झीलों को छोड़कर दूसरे आर्द्र भूमि की तरफ भागते पक्षियों की हालत को देखकर पक्षी प्रेमियों की आंखे नम हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार हालात इतने बदतर है कि घना के आर्द्र क्षेत्र और तालाब पक्षियों से खाली होने के कगार पर जा पहुंचे हैं। आपात स्थिति को देखते हुए भरतपुर एवं डीग जिले में आमजन को आपूर्ति किये जाने वाले पेयजल में कटौती करके उद्यान में चंबल का पानी पहुंचाया जा रहा है, लेकिन ये वन्य जीवों के लिए ठीक नहीं है।

उद्यान से जुड़े अधिकृत सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि अगर पांचना से जल्द ही पानी नहीं छोड़ा गया तो केवलादेव में रहने वाले जानवरों और पक्षियों की और अधिक मौतें होने लगेंगी। बताया गया है कि उद्यान की जिन झीलों में पानी कम हो रहा था, वहां से मछलियों को निकालकर डी ब्लॉक में छोड़ा गया है। पानी की कमी लगातार बनी रहने से अब घना के दूसरे जीव-जंतुओं और पक्षियों पर भी संकट गहराने लगा है।

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