नरसिंहपुर (वार्ता) मध्यप्रदेश में नरसिंहपुर जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय द्वारा जारी आउटसोर्स मल्टीटास्किंग वर्कर भर्ती से जुड़ा टेंडर विवादों में घिर गया है। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में ऐसे शासकीय निर्देशों को आधार बनाया जा रहा है, जिन्हें मध्यप्रदेश शासन के वित्त विभाग द्वारा पूर्व में ही निरस्त किया जा चुका है।
शिकायतकर्ता राजेंद्र लोधी ने आरोप लगाया है कि निरस्त आदेशों के बावजूद टेंडर प्रक्रिया संचालित की जा रही है, जो वित्तीय नियमों और मॉडल टेंडर डाक्यूमेंट के प्रावधानों के विपरीत है। उनका कहना है कि इससे न केवल शासकीय नियमों की अनदेखी हो रही है, बल्कि शासकीय धन के दुरुपयोग और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा प्रभावित होने की आशंका भी है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, इस संबंध में कलेक्टर नरसिंहपुर और लोकायुक्त कार्यालय भोपाल को शिकायत भेजी गई है, जिसमें टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कर संबंधित अधिकारियों एवं टेंडर समिति के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की मांग की गई है।
सूत्रों का कहना है कि यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो टेंडर प्रक्रिया में संशोधन अथवा निरस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है, जिससे शासन को संभावित आर्थिक क्षति से बचाया जा सके।
शिकायतकर्ता राजेंद्र लोधी ने कहा, "नियम स्पष्ट हैं, लेकिन नरसिंहपुर स्वास्थ्य विभाग में उन आदेशों को आधार बनाया जा रहा है जो अस्तित्व में ही नहीं हैं। यह सीधे तौर पर शासकीय राशि का दुरुपयोग है।" फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है।
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