श्रीनगर , अक्टूबर 26 -- पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने देशवासियाें से जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय के समय किए गए वादों को याद करने की अपील करते हुए कहा है कि केन्द्रशासित प्रदेश का भारत के साथ संबंध विश्वास, धर्मनिरपेक्षता और संवैधानिक गारंटियों पर आधारित है, जिसका उल्लंघन किया जा रहा हैसुश्री महबूबा ने सोमवार को श्रीनगर स्थित पार्टी मुख्यालय में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, "मैं देश के सभी लोगों से अपील करती हूं कि हमने ऐसे भारत के साथ हाथ मिलाया था, जो महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और डॉ. बीआर आंबेडकर का भारत है। इस भारत ने हमें सभी अधिकार दिए थे, जिनका अब उल्लंघन किया जा रहा है। मैं उनसे इसे याद रखने की अपील करती हूं। यह महज कागज का एक टुकड़ा नहीं है।" उनकी यह टिप्पणी जम्मू-कश्मीर में विलय दिवस मनाए जाने के अवसर पर आई।

गौरतलब है कि 26 अक्टूबर 1947 को महाराजा हरि सिंह ने भारत के साथ विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे। तत्कालीन भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन ने 27 अक्टूबर 1947 को इसे स्वीकार किया था, जिससे तत्कालीन रियासत का भारत में विलय औपचारिक रूप से पूरा हुआ।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने के बावजूद भारत में शामिल हुआ, क्योंकि यहां के लोगों ने देश के धर्मनिरपेक्ष नेतृत्व पर भरोसा किया था और उन्हें विश्वास था कि उनकी विशिष्ट पहचान तथा अधिकारों की रक्षा की जाएगी।

पीडीपी प्रमुख ने कहा कि विलय के दस्तावेज और उसके बाद की संवैधानिक व्यवस्थाओं में जम्मू-कश्मीर को दिए गए आश्वासन शामिल थे। इनमें उसकी विशिष्ट पहचान, जमीन और रोजगार के अवसरों की रक्षा के प्रावधान भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों ने महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, डॉ. बी. आर. आंबेडकर, मौलाना अबुल कलाम आजाद और सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व पर भरोसा जताया था। उनके अनुसार, इन नेताओं ने ऐसे धर्मनिरपेक्ष भारत की कल्पना की थी, जहां सभी धर्मों के लोग मिल-जुलकर रह सकें।

विलय के समय की परिस्थितियों को याद करते हुए सुश्री महबूबा ने कहा कि 1947 में पाकिस्तान के कबायली हमले ने घटनाक्रम को प्रभावित किया था, जिसके बाद जम्मू-कश्मीर के नेतृत्व ने भारत से सहायता मांगी थी। उन्होंने कहा कि उस समय लोगों को उम्मीद थी कि उनकी राजनीतिक आकांक्षाओं और चिंताओं का सम्मान किया जाएगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई दशकों में भारत और जम्मू-कश्मीर के बीच संबंध खराब हुए हैं। विशेष रूप से पांच अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने और जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन कर उसे दो अलग-अलग केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने के बाद स्थिति और बिगड़ी है।

उन्होंने कहा, "जम्मू-कश्मीर के लोग आज भी वहीं खड़े हैं, जहां उन्हें 1947 में छोड़ दिया गया था।" उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में अब भी पाबंदियां हैं, बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात हैं और स्थानीय निवासियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सुश्री महबूबा ने दावा किया कि युवाओं को अब भी पुलिस की जांच-पड़ताल का सामना करना पड़ता है। शिक्षा, रोजगार और अन्य अवसरों के लिए पासपोर्ट हासिल करने की कोशिश करने वालों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने क्षेत्र में लोगों की लगातार हिरासत और जांच एजेंसियों तथा निवारक हिरासत संबंधी कानूनों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए।

सुश्री महबूबा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए बल प्रयोग पर निर्भर रहने के बजाय सरकार को बातचीत और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए लोगों से जुड़ना चाहिए।

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