नयी दिल्ली , मार्च 13 -- सेना की प्रशिक्षण कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा ने तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए मजबूत सैन्य शक्ति को केंद्रीय बताते हुए शुक्रवार को कहा कि विश्वसनीय सैन्य शक्ति अब जरूरी हो गई है क्योंकि सैन्य संघर्ष पारंपरिक युद्धक्षेत्रों से आगे बढ़कर साइबर, और सूचना क्षेत्रों तक फैलते जा रहे हैं। उन्होंने यहां 10वें 'सिनेर्जिया कॉन्क्लेव' में 'विभाजित वैश्विक व्यवस्था में सैन्य हार्ड पावर' विषय पर विशेष संबोधन में कहा कि आधुनिक युद्ध कई क्षेत्रों में विकसित हो रहा है, जिससे वैश्विक शक्ति प्रतिस्पर्धा की प्रकृति बदल रही है।

ले. जनरल शर्मा ने कहा, "संघर्ष अब केवल पारंपरिक युद्धक्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि साइबर, सूचना क्षेत्र और प्रॉक्सी युद्ध तक फैल गया है। इस बदलाव ने पारंपरिक गठबंधनों को धुंधला कर दिया है और प्रभाव के नए बिंदु पैदा किए हैं, जिससे हार्ड पावर एक बार फिर राज्य संचालन का महत्वपूर्ण साधन बन गई है।"उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र, विश्व व्यापार संगठन, यूरोपीय संघ और उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन जैसे संस्थान एकतरफा कार्रवाइयों और विवादित मानकों के कारण बढ़ती चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, "ऐसी दुनिया में जहां कठोर गुटीय राजनीति कमजोर पड़ रही है, रणनीतिक स्वायत्तता अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन गई है, जो हमारे अस्तित्व के लिए राष्ट्रीय लचीलापन को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल कूटनीति और आर्थिक शक्ति से राष्ट्रीय सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जा सकती और अंततः विश्वसनीय सैन्य क्षमता ही संप्रभुता की रक्षा करती है।

वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा, "ऐसे विभाजित माहौल में आर्थिक ताकत और सॉफ्ट पावर आवश्यक तो हैं, लेकिन अपने आप में पर्याप्त नहीं हैं। एक विश्वसनीय, आधुनिक और रणनीतिक रूप से तैनात सैन्य शक्ति ही अंततः राष्ट्रीय सुरक्षा की गारंटी देती है।"भारत के बदलते सुरक्षा दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश ने रणनीतिक संयम से आगे बढ़कर संतुलित और सक्रिय कार्रवाई की दिशा में बदलाव दिखाया है।

उन्होंने कहा, "भारत ने 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 के बालाकोट हवाई हमलों और हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के जरिए यह बदलाव दिखाया है, जहां रणनीतिक संयम से आगे बढ़कर सक्रिय और संतुलित सैन्य कार्रवाई की गई।"ले. जनरल शर्मा ने कहा, "जब हमारे हितों को खतरा होता है तो सटीक कार्रवाई करने के निर्णय से हमने यह संकेत दिया है कि भारत की लाल रेखाएं अब बातचीत के लिए नहीं हैं और हमारी सैन्य शक्ति अपने संप्रभु मार्ग की रक्षा के दृढ़ संकल्प से समर्थित है।"उन्होंने हाल की एक अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई का भी उल्लेख किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आधुनिक युद्ध में साइबर, इलेक्ट्रॉनिक और खुफिया क्षमताओं का पारंपरिक सैन्य बल के साथ कैसे समन्वय किया जाता है। उन्होंने 3 जनवरी 2026 को काराकास से वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को निकालने की घटना का उल्लेख करते हुए इसे बहु-आयामी सैन्य समन्वय का उदाहरण बताया।

वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा, "वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को काराकास से निकालना कोई पारंपरिक आक्रमण नहीं था, न ही कोई घोषित युद्ध था और न ही इसमें बड़े पैमाने पर हताहत हुए। यह राष्ट्रीय हित हासिल करने के लिए सैन्य क्षमताओं का सटीक बहु-क्षेत्रीय समन्वय था।" उनके अनुसार इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली ने देश की बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली को निष्क्रिय करने में निर्णायक भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा, "कागजों पर वेनेजुएला के पास दक्षिण अमेरिका की सबसे मजबूत बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रणालियों में से एक थी, लेकिन उस रात सतह से हवा में मार करने वाली एक भी मिसाइल नहीं दागी गई।"ले. जनरल शर्मा ने कहा, "उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और नेटवर्क घुसपैठ के कारण रडार ऑपरेटरों को आसमान पूरी तरह साफ दिखाई दे रहा था, जबकि उनके ऊपर सौ से अधिक विमान उड़ान भर रहे थे।"उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन ने दिखाया कि बिना बड़े पैमाने के युद्ध में भी कमान और नियंत्रण प्रणालियों को निष्क्रिय किया जा सकता है।

उन्होंने कहा, "इस कार्रवाई ने वेनेजुएला की सैन्य तंत्रिका प्रणाली को काट दिया। संचार व्यवस्था ध्वस्त हो गई और कमांड ढांचा पंगु हो गया। बचाव दल को ठीक-ठीक पता था कि उन्हें कहां जाना है। उन्होंने तलाश नहीं की, वे सीधे अंदर गए।"इस घटना का सबक बताते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिक राष्ट्रीय सुरक्षा कई क्षेत्रों की क्षमताओं के एकीकरण पर निर्भर करती है।

वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा, "इस घटना से रणनीतिक सबक स्पष्ट है कि किसी देश की सुरक्षा उतनी ही मजबूत होती है जितनी उसकी बहु-क्षेत्रीय क्षमताओं को एकीकृत करने और राष्ट्रीय इच्छाशक्ति को एकजुट करने की क्षमता होती है।"अंत में उन्होंने कहा कि भारत को तेजी से बिखरती वैश्विक व्यवस्था में आगे बढ़ने के लिए सैन्य शक्ति को कूटनीतिक और आर्थिक उद्देश्यों के साथ समन्वित करना होगा।

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