रायपुर , जुलाई 26 -- छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि सिंधी समाज स्वाभिमान, आत्मनिर्भरता और उद्यमशीलता का जीवंत प्रतीक है। विभाजन की त्रासदी और विस्थापन की पीड़ा सहने के बावजूद समाज ने अपने परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर स्वयं को पुनर्स्थापित किया तथा राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
राज्यपाल रविवार को रायपुर में पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत द्वारा आयोजित 'मुखी संवाद' (विचार, तर्क एवं सुझाव परिचर्चा) कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि विभाजन के समय अपनी मातृभूमि, संपत्ति और सांस्कृतिक धरोहर छोड़कर आए सिंधी समाज ने विपरीत परिस्थितियों को अपनी ताकत बनाया। समाज ने अपनी संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखते हुए व्यापार, उद्योग, शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।
डेका ने कहा कि किसी भी समाज की रीढ़ उसकी पंचायतें होती हैं। सिंधी समाज की पंचायत व्यवस्था सामाजिक समरसता के साथ प्रगतिशील सोच को भी बढ़ावा देती है। उन्होंने कहा कि 'मुखी संवाद' में प्रदेशभर की 128 सिंधी पंचायतों के प्रतिनिधियों का एक मंच पर जुटना समाज की संगठनात्मक शक्ति का परिचायक है।
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