नयी दिल्ली , दिसंबर 16 -- विपक्षी दलों ने राज्यसभा में मंगलवार को सत्ता पक्ष पर चुनावों में वोट चोरी का आरोप लगाया जिस पर सत्ता पक्ष ने कहा कि इसकी शुरुआत कांग्रेस ने पहले आम चुनाव के समय ही की थी।

सदन में चुनाव सुधारों पर पिछली बैठक में अधूरी रही चर्चा को आगे बढ़ाते हुए बहुजन समाज पार्टी के रामजी ने कहा कि किसी उम्मीदवार का आपराधिक इतिहास अखबारों में प्रकाशित करने की जिम्मेदारी उम्मीदवार और राजनीतिक दल को दी गयी है। कई बार उम्मीदवार पार्टी से भी यह जानकारी छिपाते हैं। इसलिए, राजनीतिक दलों को इस जिम्मेदारी से मुक्त किया जाना चाहिये।

झारखंड से भारतीय जनता पार्टी के प्रदीप कुमार वर्मा ने कहा कि लंबे समय से मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम नहीं हुआ था और यह जरूरी हो गया था। इससे बोगस मतदान रुकेगा।

शिवसेना-यूबीटी की प्रियंका चतुर्वेदी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान वोट चोरी का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव से विधानसभा चुनाव तक 48 लाख मतदाता बढ़ गये। उन्होंने कहा कि जब वोट चोरी से काम नहीं बनता तो पार्टी चोरी होती है, और उससे भी बात नहीं बनती तो चंदा चोरी करते हैं। जो कंपनियां सत्ता पक्ष के दलों को चंदा देती हैं उन्हें उपकृत किया जाता है और जो विपक्षी दलों को चंदा देती हैं उनके खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों को लगा दिया जाता है।

मध्य प्रदेश से भाजपा की सुमित्रा बाल्मिकी ने हाल के वर्षों में चुनाव सुधारों की तारीफ करते हुए कहा कि पहले किसी स्कूल अध्यापक की चुनाव ड्यूटी लग जाती थी तो उसके घर में मातम छा जाता था - पता नहीं घर के एक मात्र कमाने वाला सदस्य सकुशल वापस आये या नहीं। आज महिलाएं और युवतियां बिना डरे कतारों में खड़ी होकर वोट डालती हैं।

केरल से इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के हारिस बीरन ने मताधिकार को संविधान के तहत मौलिक अधिकार बनाने की वकालत करते हुए कहा कि अपने घर से दूर और विदेशों में भी रोजी कमाने वालों के लिए भी मतदान की व्यवस्था की जानी चाहिये।

उत्तर प्रदेश से भाजपा के सुरेंद्र सिंह नागर ने वोट चोरी को विपक्ष के आरोपों पर कहा कि देश में सबसे पहले 1952 में कांग्रेस ने वोट चोरी की शुरुआत की थी जब 74 हजार मतपत्र अमान्य कर बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर को हराने की साजिश की गयी थी। श्री नागर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने जे.बी. कृपलानी के साथ भी वही किया। मनी पावर का इस्तेमाल करते हुए चुनावों में साड़ी, धोती और कमीज बांटी गयी। कांग्रेस के समय में चुनाव आयुक्त रहे लोगों को सेवानिवृत्ति के बाद ऊंचे पद देकर नवाजा गया।

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