जयपुर , मार्च 01 -- राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने पक्ष और विपक्ष को लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा है कि देश में जो माहौल हैं उसमें विपक्ष को कुछ समझना नहीं, रोज भला बुरा कहना , तमाम तरह की पीड़ाए देना, उत्पीड़न एवं शोषण करना तथा दबाना लोकतंत्र के लिए यह स्वस्थ परंपरा नहीं है।
श्री पायलट रविवार को यहां पूर्व मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर की सौंवीं जयंती के अवसर पर 'रिफार्मिंग गवर्नेंस' विषय पर आयोजित विशेष स्मृति समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने सिस्टम को सुधारने की जरुरत बताते हुए कहा कि देश में जो राजनीति हो रही हैं और आजकल क्या माहौल हैं, देश में कड़वाहट, घृणा, टकराव, नफरत का। उन्होंने कहा कि सुनने की शक्ति रखना राजनीति में पहली प्राथमिकता होनी चाहिए, जब सुनने की शक्ति खत्म हो जाती है तब इंसान का पतन तय हैं। देश में जो माहौल हैं, 'मै सही दुनिया गलत' ऐसा नहीं होना चाहिए। लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत पक्ष विपक्ष मिलकर हैं।
उन्होंने राजनीति में प्रधान, विधायक, सांसद आदि जनप्रतिनिधियों को समाज का प्रतिबिंब बताते हुए कहा कि अब समय बदला है, समाज बदला और देश में प्रगति भी हुई और लोग साधन सम्पनन भी हुए लेकिन मौलिक अधिकार से एक ईमानदार नेता अपनी बात कह सकता हैं, वह मौलिक शक्ति सच्चाई एवं ईमानदारी से आती हैं, वह कुर्सी पर बैठने से नहीं आती । यह बात अधिकारियों के लिए भी है। उन्होंने कहा कि राजनीति में जो बदलाव आये हैं वह बहुत ज्लदी आये हैं और जिस संयम, संजीदगी, सोच विचार एवं अध्ययन करके जो निर्णय लेने की पुरानी पीढ़ी के नेताओं की जो परिपाटी थी उस रास्ते से भटके हैं लेकिन यह भारत में ही नहीं विदेश में भी इस प्रकार चल रहा है।
श्री पायलट ने कहा कि जवाबदेही, देश, समाज एवं मानवता के हित में काम करने के प्रति देश और दुनिया में गिरावट आई हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतकर सत्ता सुख एक बात हैं लेकिन जो शासक एवं मुखिया है उसे अपना 70 प्रतिशत समय प्रशासन , संगठन, क्रियान्वयन एवं विकास में बिताना चाहिए बाकी 30 प्रतिशत समय राजनीति करनी है, पार्टी चलानी आदि में हो। उन्होंने कहा कि बहुत कम लोग है जो शासक एवं प्रशासक सरकारों को चलाते समय खुद की सोच, एजेंडा एवं मिशन हो और उसको पाने के लिए पूरी ताकत एवं संसाधन के साथ उपयोग करता हो।
उन्होंने कहा कि राजनीति में शोध होना चाहिए और पढ़ना लिखना एवं समझना चाहिए। राजनीति में प्रतिस्पर्धा हो गई हैं और जनप्रतिनिधियों को भी पढते रहना जरुरी है कि उन्हें मालूम रहे कि देश दुनियां में क्या हो रहा है।
श्री पायलट ने कहा कि विश्वास पैदा करने के लिए मन और दिमाग को साफ रखना पड़ता हैं और विश्वनीयता पैदा करने के लिए समय लगता हैं और बहुत कठिन भी हैं। हमारे काम, सोच, कैसी कार्यपणाली, क्या बोल रहे हैं और क्या कर रहे है यह दिख जाता है। पुराने नेता अड़ियल एवं जिद्दी होते थे लेकिन वे बात पर अडिग भी रहते थे। उन्होंने कहा कि अनिर्णय गलत निर्णय से बुरा होता हैं। बोले कुछ और करे कुछ तो फिर लोग उसे गंभीरता से नहीं लेते है।
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