नयी दिल्ली , जुलाई 27 -- नीट परीक्षा के पेपर लीक मुद्दे पर राजधानी में पिछले दिनों आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों पर पुलिस की कथित ज्यादतियों को लेकर राज्य सभा में तत्काल चर्चा की मांग कर रहे विपक्षी सदस्यों के लगातार हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दूसरी बार दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी।
कई विपक्षी सदस्यों ने इस मुद्दे पर नियम 267 के तहत चर्चा के लिए कार्यस्थगन प्रस्ताव के नोटिस दे रखे थे जिसे सभापति सभापति सीपी राधाकृष्णन ने नियमों और परंपराओं का हवाला देते हुए अस्वीकार कर दिया। पहले स्थगन के बाद सदन की कार्यवाही 12 बजे शुरू हुई थी कि विपक्षी सदस्यों ने सब काम रोक कर विद्यार्थियों पर पुलिस कार्यवाही के मुद्दे पर चर्चा की मांग शुरू कर दी। सदन में शोर शराबा बढ़ते देख सभापति ने कार्यवाही दुसरी बार दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
कार्यवाही 12 बजे दोबारा शुरू होते ही कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने नीट परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर जंतर मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और संसद मार्च के दौरान उनके साथ बदसलूकी का मुद्दा उठाया और इस पर चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि देश में कहीं भी कुछ होता है तो उसकी झलक सदन में दिखनी चाहिए।
सभापति ने कहा कि यह प्रश्नकाल का समय है और प्रश्नकाल हो जाने दीजिए लेकिन विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहा।
इसी बीच सभापति श्री राधाकृष्ण ने द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम (द्रमुक) के तिरूची शिवा को बोलने की अनुमति दी और श्री शिवा ने नीट परीक्षा पर प्रतिबंध लगाने की मांग दोहरानी शुरू कर दी और कहा कि नीट परीक्षा रद्द किये जाने के कारण कई विद्यार्थियों ने आत्महत्या कर ली। श्री शिवा ने कहा कि उन्होंने नियम 267 के तहत इस मुद्दे पर चर्चा के लिए कार्य स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया गया है।
सभापति ने उन्हें बीच में ही रोक कर मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के जॉन ब्रिटास को बोलने की अनुमति दी । उन्होंने इसी मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह को घेरने की कोशिश की। सभापति की अनुमति से खड़े हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के पी संदोष कुमार ने भी इसी मुद्दे पर बोलना चाहा, जिसके साथ सदन में हंगामा तेज हो गया। हंगामे को देखते हुए सभापति ने सदन की कार्यवाही दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
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