नयी दिल्ली , सितंबर 03 -- उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया और राज्यों की बार काउंसिलों के पास विधि के छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसे अनुशासनात्मक अधिकार केवल छात्र के मूल संस्थान या संस्थान को संचालित करने वाले नियमों अथवा उप-नियमों के तहत निर्धारित प्राधिकारी के पास निहित होते हैं। बार काउंसिल किसी व्यक्ति पर अनुशासनात्मक अधिकार क्षेत्र केवल तभी हासिल करती है जब वह एक अधिवक्ता के रूप में नामांकित हो जाता है।

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