अमृतसर , अक्टूबर 13 -- पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता प्रो. सरचंद सिंह ख्याला ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा की बयानबाजी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि सिख संस्थाओं को राजनीतिक विवादों में घसीटने की यह प्रवृत्ति अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत मान की राजनीति तथा सिख-विरोधी मानसिकता का हिस्सा है।

प्रो. ख्याला ने आरोप लगाया कि श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय के लिए कथित तौर पर 'दुष्कर्मियों का अड्डा' जैसी अपमानजनक शब्दावली का इस्तेमाल सिख पंथ की सर्वोच्च संस्था की गरिमा पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं लेकिन उनकी आड़ में धार्मिक संस्थाओं का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता।उन्होंने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) से मांग की कि ग्यासपुरा के बयान से जुड़े साक्ष्यों की जांच कर उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए और मामले को श्री अकाल तख्त साहिब के संज्ञान में भी लाया जाए।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि हरियाणा के होद चिल्लड़ में सिख नरसंहार के मामले को दुनिया के सामने लाने के कारण सिख समुदाय में सम्मान हासिल करने वाले ग्यासपुरा का कथित तौर पर राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के चलते पंथक सरोकारों से भटकना अफसोसजनक है। उन्होंने सचिवालय में प्रवेश नहीं मिलने के मामले को जातीय भेदभाव से जोड़ने संबंधी ग्यासपुरा के आरोपों पर भी सवाल उठाए।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि यदि उनके पास जातिसूचक टिप्पणी या भेदभाव का कोई प्रमाण है, तो उसे सार्वजनिक करना चाहिए। बिना साक्ष्य सिख संस्थाओं पर जातिवाद के आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि इस पहलू की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और एसजीपीसी में नौकरियों में भेदभाव के आरोपों को भी तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर परखा जाना चाहिए।

प्रो ख्याला ने कहा कि सिख संस्थाओं की कमियों पर सवाल उठाना किसी का भी अधिकार है, लेकिन सुधार के नाम पर संस्थाओं का अपमान करना और संगत में भ्रम फैलाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब किसी राजनीतिक दल या नेता की लड़ाई का मंच नहीं, बल्कि सिख पंथ की सर्वोच्च संस्था है। इसकी मर्यादा से जुड़े मामलों में न दोहरे मापदंड होने चाहिए और न ही राजनीतिक दबाव में निर्णय लिए जाने चाहिए। उन्होंने गुरुद्वारा बंगला साहिब से जुड़े विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों की मर्यादा और राजनीतिक गतिविधियों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। गुरुद्वारों को राजनीतिक प्रदर्शन या नारेबाजी का मंच बनाने के बजाय वहां के नियमों और मर्यादा का पालन किया जाना चाहिए।

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