बेंगलुरु , फरवरी 20 -- कर्नाटक में विधान सौध परिसर के भीतर मीडिया की पहुंच पर कथित प्रतिबंधों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है और इन कदमों की तुलना 1975 में लागू आपातकाल से करते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताया है।
प्रदेश भाजपा ने एक बयान में कहा कि 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल के दौरान मीडिया की आवाज दबा दी गई थी और लोकतांत्रिक संस्थाओं को सीमित कर दिया गया था। पार्टी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के नेतृत्व में कर्नाटक में उसी "अंधेरे अध्याय" की पुनरावृत्ति हो रही है।
बयान में कहा गया कि विधान सौधा परिसर में पत्रकारों की आवाजाही और पहुंच पर रोक लगाना पारदर्शिता को सीमित करने और लोकतांत्रिक जवाबदेही को कमजोर करने के समान है। भाजपा ने कहा, "तब देश पर आपातकाल का साया था, आज कांग्रेस सरकार प्रतिबंधों के जरिए कर्नाटक की लोकतांत्रिक शक्ति को बंद कर रही है।"पार्टी ने कांग्रेस पर असहमति की आवाज दबाने का पुराना इतिहास होने का आरोप लगाते हुए कहा कि सवाल पूछने वालों का मुंह बंद करना उसकी पुरानी संस्कृति रही है। भाजपा ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया।
सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस बीच मीडिया संगठनों की ओर से विधानसभा परिसर में लगाए गए कथित प्रतिबंधों की प्रकृति और दायरे को लेकर राज्य प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगे जाने की संभावना है।
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