लखनऊ , फरवरी 18 -- उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य विजय बहादुर पाठक ने नियम 110 के अंतर्गत जनहित से जुड़े एक महत्वपूर्ण विषय बच्चों में तेजी से बढ़ रहे फोन एडिक्शन पर चर्चा के लिए सूचना दी। सभापति ने इस विषय को गंभीर मानते हुए सरकार को प्रभावी कार्यवाही के लिए प्रेषित कर दिया।

श्री पाठक ने कहा कि तकनीक के विकास से जहाँ जनजीवन अधिक व्यवस्थित और सुगम हुआ है, वहीं इसके दुष्प्रभाव भी सामने आ रहे हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान स्कूलों में डिजिटल पढ़ाई की जो व्यवस्था शुरू की गई थी, वह उस समय की आवश्यकता थी मगर परिस्थितियां सामान्य होने के बाद भी कई स्कूलों में उसी डिजिटल पैटर्न को जारी रखा गया है।

उन्होंने बताया कि राज्य के अनेक विद्यालयों में अब पारंपरिक डायरी की जगह व्हाट्सएप और ऑनलाइन पोर्टल ने ले ली है। होमवर्क, असाइनमेंट और अन्य कार्यक्रमों की जानकारी डिजिटल माध्यम से अभिभावकों तक पहुंचाई जा रही है। समय की बचत के उद्देश्य से अपनाई गई यह व्यवस्था बच्चों के हाथों में मोबाइल की बढ़ती निर्भरता का कारण बन रही है।

विजय बहादुर पाठक ने कहा कि अभिभावकों को मजबूरी में बच्चों को मोबाइल देना पड़ रहा है, जिससे उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। सामाजिक वैज्ञानिकों के अनुसार, जब बच्चा पढ़ाई के बहाने मोबाइल लेता है तो धीरे-धीरे वह गेम और रील की ओर आकर्षित हो जाता है, जिससे उनमें एडिक्टिव व्यवहार विकसित हो रहा है।

उन्होंने कहा कि कई मनोरोग विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम बच्चों की एकाग्रता और स्मरण शक्ति को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कई देशों में बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर सख्त नियम लागू हैं। ऐसे में प्रदेश में भी इस विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए ठोस नीति और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। अंत में उन्होंने लोक महत्व के इस गंभीर विषय पर व्यापक चर्चा कर प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित किए जाने की मांग की।

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