विद्या शंकर रायलखनऊ , नवंबर 2 -- उत्तर प्रदेश में विधान परिषद के लिए हाल में हुए चुनावों में लखनऊ और वाराणसी की सीटों पर मिली हार ने पार्टी नेतृत्व को गहरी चिंता में डाल दिया है और पार्टी अपने ही गढ़ में ऐसे परिणामों के वास्तविक कारणों की खोज में लग गयी है।
गोरखपुर क्षेत्र में मिली जीत ने पार्टी की लाज बचा ली लेकिन अगले साल के शुरू में राज्य में विधान सभा चुनाव पहले लखनऊ और वाराणसी क्षेत्र में मिली हार के असर को लेकर संगठन चिंतित है। पार्टी सूत्राें के अनुसार इन परिणामों को लेकर संगठनात्मक जवाबदेही तय करने और आगे की चुनावी तैयारियों को लेकर संगठन के अंदर चर्चा तेज हो गई है। वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लखनऊ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का संसदीय क्षेत्र है।
भाजपा के एक सूत्र ने कहा कि इस नतीजे के बाद प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक संगठन के नेताओं के बीच चुनावी रणनीति और स्थानीय संगठन की भूमिका के विश्लेषण की चर्चा है। सूत्रों के मुताबिक, खास कर वाराणसी में मिली हार को पार्टी नेतृत्व ने गंभीरता से लिया है। पार्टी यह समझना चाहती है कि विधान परिषद चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लगातार दौरों के अलावा प्रदेश अध्यक्ष, आठ विधायकों, चार मंत्रियों और महापौर समेत पार्टी के कई नेताओं के सक्रिय अभियान के बाद भी पार्टी प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित नहीं की जा सकी।
भाजपा नेतृत्व की ओर से हालांकि अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, पर सूत्रों के मुताबिक, अब वाराणसी में चुनावी प्रदर्शन की समीक्षा की जा सकती है। इसमें विधायकों के कामकाज, बूथ स्तर पर संगठन की सक्रियता, मतदाता संपर्क और चुनाव प्रबंधन की पड़ताल होने की बात कही जा रही है। चर्चा वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी है। पार्टी के कुछ वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने कहा कि वाराणसी की आठ विधानसभा सीटों में से पांच पर मौजूदा विधायकों के टिकट बदले जा सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में भाजपा नेतृत्व की ओर से अभी कोई आधिकारिक घोषणा या पुष्टि नहीं हुई है।
वाराणसी खंड की शिक्षक और स्नातक, दोनों विधान परिषद सीटों पर समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की है। शिक्षक सीट पर लाल बिहारी यादव ने भाजपा के प्रमोद कुमार मिश्र को हराया, जबकि स्नातक सीट पर आशुतोष सिन्हा ने भाजपा के केदारनाथ सिंह को पराजित किया।
वरिष्ठ पदाधिकारियों की मानें तो दोनों सीटों पर हार के बाद भाजपा के सामने स्थानीय संगठन की पकड़, जनप्रतिनिधियों की सक्रियता और चुनावी रणनीति की समीक्षा की चुनौती है।
वाराणसी में हार को लेकर जब उत्तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े से सवाल पूछा गया तो उन्होंने केवल इतना कहा कि वाराणसी में जो सीटें भाजपा हारी है वो पहले भी हमारे पास नहीं थी। लेकिन कमियों पर मंथन किया जाएगा।
भाजपा नेता और लखनऊ पूर्वी से टिकट के प्रमुख दावेदार डॉक्टर अविनाश रुद्रप्रकाश ने कहा कि चुनाव में हार जीत तो लगी रहती है। भाजपा की यही खूबी है कि उसके कार्यकर्ता हार के बाद भी पूरे उत्साह के साथ मैदान में डटे रहते हैं। यही वजह है कि भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ 2027 में सरकार बनाएगी।
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक खंड चुनाव में 11 सीटों में से भाजपा को 6 और समाजवादी पार्टी को 5 सीटों पर जीत हासिल हुई है। इन नतीजों के बाद उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा था कि कुछ सीटें ऐसी हैं जहाँ समाजवादी पार्टी का खाता नहीं खुलना चाहिए था। श्री मौर्य के इस बयान को वाराणसी में मिली हार से ही जोड़कर देखा जा रहा है।
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