मुंबई , अक्टूबर 29 -- शिवसेना (यूबीटी) नेता एवं राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने गुरुवार को कहा कि विधान परिषद चुनाव के नतीजे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत महायुति सरकार के प्रति बढ़ते असंतोष को दर्शाते हैं।
श्री राउत ने विधान परिषद (एमएलसी) चुनावों के नतीजों, ठाणे में कानून-व्यवस्था की स्थिति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस सोशल मीडिया पोस्ट का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कांग्रेस पार्टी का मजाक उड़ाया था। चुनाव नतीजों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने दावा किया कि प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों में पढ़े-लिखे स्नातकों और मतदाताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके महायुति सहयोगियों को नकार दिया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में ज्यादातर सीटें शिक्षण संस्थानों के प्रबंधकों ने जीती हैं, जबकि वहां बड़े पैमाने पर नकदी बांटने के आरोप लगे हैं। उन्होंने दावा किया कि हर शिक्षक को 10,000 रुपये बांटे गये।" उन्होंने इन चुनावों की तुलना स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों से की, जहां उनके अनुसार सत्तारुढ़ गठबंधन को राजनीतिक झटका लगा है।
श्री राउत ने वाराणसी और नागपुर में मिली चुनावी हार का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा अब 'आत्मनिरीक्षण के कारण अपच' से जूझ रही है। उन्होंने ठाणे में चल रहे राजनीतिक तनाव पर बात करते हुए अपनी पार्टी के वहां जाने के फैसले का बचाव किया और कहा, "ठाणे किसी के बाप का नहीं है, हम दोपहर तीन बजे ठाणे जा रहे हैं।"उन्होंने सवाल उठाया कि 'पुर्नेकर' के सुपारी देकर हत्या करवाने के मास्टरमाइंड के बारे में जवाब मांगना, सत्तारुढ़ नेताओं को बदनाम करने की कोशिश कैसे हो सकता है? उन्होंने विपक्ष के प्रतिनिधियों को दी जा रही धमकियों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अगर सत्तारुढ़ दल के नेता 'हम तुम्हें देख लेंगे' जैसी धमकियां देना जारी रखते हैं, तो गृह मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए और ठाणे पुलिस आयुक्त का तबादला कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री के उस सोशल मीडिया पोस्ट की भी आलोचना की, जिसमें उन्होंने 28 चुनावी सीटों पर कांग्रेस पार्टी के प्रदर्शन का मजाक उड़ाया था। उन्होंने इस पोस्ट को 'ओछा' बताया और कहा कि यह प्रधानमंत्री के पद के अनुरूप नहीं है।
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