लखनऊ , दिसंबर 22 -- राष्ट्रगीत वंदेमातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उत्तर प्रदेश विधानसभा में हुई विशेष चर्चा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने इसे आज़ादी की लड़ाई की साझा धरोहर बताते हुए अपने-अपने विचार रखे। चर्चा के दौरान इतिहास, राष्ट्रभावना और वर्तमान सामाजिक संदर्भों पर व्यापक विमर्श हुआ।

मत्स्य एवं निषाद कल्याण मंत्री संजय निषाद ने कहा कि वंदेमातरम् का सम्मान किसी एक राजनीतिक दल का एजेंडा नहीं है। उन्होंने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि अंग्रेज जल मार्ग से भारत आए थे और सबसे पहले निषाद समाज के लोगों ने उनका विरोध किया और कानपुर के पास अंग्रेजों की करीब 300 नावें डुबोकर निषाद समाज के लोगों ने उन्हें मार गिराया था।

समाजवादी पार्टी की विधायक रागिनी सोनकर ने कहा कि जिस दौर में पूरा देश अंग्रेजों की गुलामी झेल रहा था, उसी समय बंगाल से वंदेमातरम् की आवाज़ उठी, जो आज़ादी की लड़ाई का हथियार बनी। उन्होंने कहा कि वंदेमातरम् किसी जाति या धर्म विशेष का नहीं, बल्कि पूरे देश की भावना है।

सोनकर ने सरकार पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाते हुए कहा कि आज राष्ट्रगीत की मर्यादा पर चर्चा जरूरी है। अपनी बात रखते हुए उन्होंने सदन में एक देशभक्ति गीत भी गाया, जिसे सदस्यों ने गंभीरता से सुना।

सपा विधायक अतुल प्रधान ने कहा कि वंदेमातरम् का नाम आते ही मन देशभक्ति से भर जाता है। उन्होंने कहा कि 1857 की क्रांति जहां से शुरू हुई, वहीं से इस चर्चा में शामिल होना एक सुखद संयोग है। अतुल प्रधान ने कहा कि संविधान सभा ने सर्वसम्मति से वंदेमातरम् को राष्ट्रगीत के रूप में स्वीकार किया था और यह देश की साझा पहचान है।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) विधायक उमाशंकर सिंह ने कहा कि वंदेमातरम् को राष्ट्रगीत के रूप में अपनाने का निर्णय संविधान सभा ने लिया था। उन्होंने कहा कि यह गीत संस्कृत और बांग्ला भाषा में लिखा गया और कई बार अंग्रेजों ने इस पर प्रतिबंध लगाया, क्योंकि वे इसकी ताकत से डरते थे।

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