रायपुर , मार्च 09 -- छत्तीसगढ़ विधानसभा के प्रश्नकाल में सोमवार को दिव्यांगजनों को पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के जवाब पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कटाक्ष करते हुए कहा कि ऐसा उत्तर समझ से परे है कि कोई अधिकारी पदोन्नति लेना ही नहीं चाहता।

प्रश्नकाल के दौरान विधायक प्रमोद मिंज ने दिव्यांग कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण का विषय उठाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के प्रावधान और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार पदोन्नति में चार प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है, लेकिन राज्य में इस दिशा में अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने यह भी पूछा कि पदोन्नति की प्रक्रिया कब शुरू होगी और इसके लिए समयसीमा क्या तय की गई है।

इस पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने दिव्यांग कर्मचारियों के लिए पदोन्नति में तीन प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान रखा है, लेकिन अभी तक इस श्रेणी में कोई पदोन्नति नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि पदोन्नति के लिए आवेदन भी प्राप्त नहीं हुए, केवल एक आवेदन आया था जिसे बाद में वापस ले लिया गया।

मंत्री के इस उत्तर पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तंज कसते हुए कहा कि यह कैसे संभव है कि कोई अधिकारी पदोन्नति ही नहीं लेना चाहता। उन्होंने हल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए कहा कि लगता है अभी तक होली का असर खत्म नहीं हुआ है।

इसी दौरान प्रश्नकाल में विधायक चैतराम अटामी ने दंतेवाड़ा जिले में कुपोषण की स्थिति का मुद्दा उठाया। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने जानकारी दी कि जिले में 5203 बच्चों को कुपोषित श्रेणी में चिन्हित किया गया है और उनके लिए पोषण आहार, टीकाकरण तथा स्वास्थ्य जांच जैसे कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

विधायक अटामी ने सहायता राशि समय पर नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया। इस पर मंत्री ने कहा कि राज्यभर में निर्धारित समय पर पोषण आहार उपलब्ध कराया जा रहा है और दंतेवाड़ा में भी स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार निगरानी कर रही है।

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