चंडीगढ़, अगस्त 10 -- पंजाब विधानसभा ने सोमवार को कर्मचारियों के कल्याण और अधिकारोंसे जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए "पंजाब स्टेट आउटसोर्स्ड पर्सनेल (ट्रांजिशन टू कॉन्ट्रैक्चुअल एंगेजमेंट) बिल, 2026" सर्वसम्मति से पारित कर दिया। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इसे कर्मचारियों के हित में ऐतिहासिक फैसला बताया और कहा कि इसके साथ पंजाब में दशकों पुरानी सरकारी सेवाओं में आउटसोर्सिंग की व्यवस्था समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा कि नये कानून से सरकारी रोजगार में निजी ठेकेदारों की भूमिका समाप्त होगी और कर्मचारियों तथा सरकार के बीच सीधा संबंध स्थापित होगा। पहले चरण में लगभग 26 हजार से 28 हजार आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधे सरकार के साथ अनुबंध के तहत लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि ये कर्मचारी अब 'आउटसोर्स्ड' नहीं, बल्कि 'इन-सोर्स्ड' कर्मचारी होंगे और सरकारी परिवार का हिस्सा बनेंगे।

श्री मान ने कहा कि पंजाब में हजारों आउटसोर्स कर्मचारी वर्षों से राज्य की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने सरकारी योजनाओं को जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने और राज्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हालांकि, निजी ठेकेदारों की व्यवस्था के कारण कर्मचारियों के बीच नौकरी को लेकर लगातार असुरक्षा बनी रहती थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नये कानून का उद्देश्य अनुबंधित सेवा के नाम पर होने वाले शोषण को समाप्त करना है। इसके तहत सरकारी विभागों और सरकार के नियंत्रण वाले संस्थानों में काम कर रहे पात्र आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधे सरकार के साथ अनुबंधित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह कानून ग्रुप-सी और ग्रुप-डी श्रेणी के उन पात्र आउटसोर्स कर्मचारियों पर लागू होगा, जो आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं में कार्यरत हैं और निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं। पहले चरण में करीब 26 से 28 हजार कर्मचारियों को इसका तत्काल लाभ मिलने की उम्मीद है।

कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी पारिश्रमिक राशि मौजूदा वेतन या कानूनी रूप से निर्धारित न्यूनतम मजदूरी, जो भी लागू हो, उससे कम नहीं होगी। पात्र कर्मचारियों को प्रोविडेंट फंड (पीएफ), ग्रेच्युटी और ईएसआई का लाभ मिलेगा। इसके अलावा उन्हें मातृत्व अवकाश और नियमित कर्मचारियों की तरह प्रति वर्ष 10 दिन का आकस्मिक अवकाश (कैजुअल लीव) भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि इन कर्मचारियों के लिए आईएचआरएमएस अकाउंट भी बनाया जाएगा, जिससे उनके सेवा रिकॉर्ड और रोजगार संबंधी जानकारी में अधिक पारदर्शिता आएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में आउटसोर्सिंग एजेंसियों द्वारा कर्मचारियों से 15 से 22 प्रतिशत तक कमीशन लिया जाता है। नये प्रावधानों के लागू होने के बाद यह एजेंसी कमीशन कर्मचारियों की कमाई से नहीं काटा जाएगा और इसका सीधा आर्थिक लाभ कर्मचारियों को मिलेगा।

श्री मान ने कहा कि पंजाब सरकार का यह कदम सरकारी सेवाओं में वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों को अधिक आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक लाभ देने के साथ-साथ निजी ठेकेदारों पर उनकी निर्भरता समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

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