विद्या शंकर रायलखनऊ , अगस्त 29 -- उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने विकास और निर्माण कार्यों को गति देने की तैयारी शुरू कर दी है। विभाग उन जिलों में अधिकारियों, अभियंताओं और कर्मचारियों की तैनाती की योजना बना रहा है, जहां निर्माण कार्यों का दबाव अधिक है। योगी सरकार की मंशा है चुनाव से पहले विधानसभावार योजनाओं को गति पकड़ाई जाये जिससे सरकार के पक्छ में माहौल बन सके।
अधिकारियों की माने तो फिलहाल प्रदेश के 11 जिलों में विधानसभा क्षेत्रवार अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की शुरुआत की जा चुकी है। इनमें अंबेडकरनगर, सुलतानपुर, आजमगढ़, बरेली, बस्ती, बहराइच, कानपुर नगर, सीतापुर, मुरादाबाद, कौशांबी और प्रयागराज शामिल हैं।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, विश्व बैंक से वित्त पोषित सड़क परियोजनाएं लगभग पूरी हो चुकी हैं। पिछले करीब तीन वर्षों से विश्व बैंक से कोई नया प्रोजेक्ट भी नहीं मिला है। पुराने प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं और कुछ चुनिंदा परियोजनाओं में केवल दो से छह महीने तक का मरम्मत और रखरखाव का काम बचा है।
इसी तरह प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत ग्रामीण क्षेत्रों और बस्तियों को सड़क संपर्क से जोड़ने का काम भी लगभग पूरा हो चुका है। इन दोनों योजनाओं के लिए पीडब्ल्यूडी में अलग-अलग निर्माण खंड बनाए गए थे। अब काम का बड़ा हिस्सा पूरा होने के बाद इन अलग निर्माण खंडों के पुनर्गठन पर विचार किया जा रहा है।
दरअसल प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की शुरुआत 25 दिसंबर 2000 को ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी और बस्तियों को हर मौसम में आवागमन योग्य सड़कों से जोड़ने के उद्देश्य से की गई थी।
योजना के तहत सड़क निर्माण के साथ आवश्यकता के अनुसार पुलों का भी निर्माण कराया गया। अधिकारियों के मुताबिक, योजना के निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप प्रदेश में इसका अधिकांश काम पूरा हो चुका है।
विभागीय पुनर्गठन की यह कवायद पूरी होने के बाद अलग-अलग योजनाओं के लिए बने प्रशासनिक और तकनीकी ढांचे को कम करके नियमित पीडब्ल्यूडी निर्माण खंडों के माध्यम से काम कराने की व्यवस्था लागू की जा सकती है। हालांकि, अंतिम निर्णय संबंधित रिपोर्ट और शासन स्तर पर होने वाले विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाएगा।
पीडब्ल्यूडी ने प्रदेश की सभी निर्माण इकाइयों और निर्माण खंडों से कर्मचारियों की संख्या, स्वीकृत और लंबित कार्यों, उपलब्ध बजट, निर्माणाधीन सड़कों और भविष्य की परियोजनाओं का ब्योरा मांगा है। रिपोर्ट मिलने के बाद चरणबद्ध तरीके से ऐसे खंडों को संबंधित सामान्य निर्माण खंड या स्टेट डिवीजन में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
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