चेन्नई , मई 16 -- तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद मुख्य विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने हार के कारणों का विश्लेषण और आत्मनिरीक्षण के लिए शनिवार को 36 सदस्यीय समिति का गठन किया ।
अभिनेता विजय की पार्टी 'टीवीके' (टीवीके) के शानदार प्रदर्शन के बाद दूसरे स्थान पर रही द्रमुक के अध्यक्ष एम. के. स्टालिन ने इस समिति से हार की वजहों पर एक निष्पक्ष और स्पष्ट रिपोर्ट मांगी है।
राज्य में सत्ता विरोधी लहर न होने के बावजूद मिली इस अप्रत्याशित हार को देखते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने समीक्षा पैनल को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने समिति के सदस्यों को शनिवार को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि यह अभ्यास महज एक औपचारिकता नहीं, बल्कि पार्टी की चुनावी गिरावट के मूल कारणों को समझने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इस पैनल को तमिलनाडु के सभी 234 विधानसभा क्षेत्रों में व्यापक जमीनी अध्ययन करने और कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय पदाधिकारियों से सीधे फीडबैक लेने का काम सौंपा गया है।
श्री स्टालिन ने इस समीक्षा प्रक्रिया की तुलना 'मेडिकल डायग्नोसिस' (चिकित्सकीय निदान) से की। उन्होंने कहा कि जिस तरह एक डॉक्टर को प्रभावी इलाज के लिए मरीज की बीमारी के बारे में सही और ईमानदार जानकारी चाहिए होती है, उसी तरह पार्टी नेतृत्व को सुधारात्मक कदम उठाने के लिए जमीनी हकीकत की पूरी जानकारी चाहिए।
उन्होंने टिप्पणी की, "डॉक्टर कहते हैं कि उनसे कभी सच नहीं छिपाना चाहिए। मैं अब उसी स्थिति में हूँ।" उन्होंने समिति द्वारा सौंपी जाने वाली अंतिम रिपोर्ट को द्रमुक के लिए एक "स्कैन रिपोर्ट" बताया, जो किसी भी "दवा" (सुधारात्मक उपाय) को देने से पहले "बीमारी" की स्पष्ट पहचान करेगी।
समिति को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 5 जून तक की समय सीमा दी गई है। खुद अपनी पारंपरिक सीट कोलाथुर से हार का सामना करने वाले स्टालिन ने जोर देकर कहा कि यह समीक्षा आंतरिक राजनीति, पक्षपात या दोषारोपण से मुक्त होनी चाहिए। उन्होंने पैनल के सदस्यों से कहा, "आपका कर्तव्य न तो किसी को बचाना है और न ही किसी को निशाना बनाना है।"श्री स्टालिन ने पारदर्शिता पर जोर देते हुए यहां तक कहा कि यदि चुनाव में हार के लिए उनकी खुद की कार्यशैली या नेतृत्व की आलोचना की जाती है, तो उसे भी रिपोर्ट में बेझिझक शामिल किया जाए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपनी शिकायतों और असंतोष को खुलकर व्यक्त करने का आग्रह किया।
श्री स्टालिन ने निर्देश दिया कि प्रक्रिया में एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए यह समीक्षा कार्य दो-सदस्यीय टीमों द्वारा किया जाएगा। पैनल के सदस्यों को पार्टी मुख्यालय की "आंख और कान" बताया गया है, जिनका मिशन संगठनात्मक कमजोरियों, चुनावी अभियान की विफलताओं, मतदाताओं के बदलते मिजाज और स्थानीय नेतृत्व के मुद्दों की पहचान करना है।
श्री स्टालिन ने पूरी प्रक्रिया के दौरान गोपनीयता बनाए रखने पर भी जोर दिया और कहा कि एकत्र किए गए फीडबैक को उन लोगों के साथ साझा नहीं किया जाना चाहिए जिनका मूल्यांकन किया जा रहा है। द्रमुक का यह कदम ऐसे समय में आया है जब पार्टी अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने और कार्यकर्ताओं व मतदाताओं के बीच विश्वास बहाल करने की कोशिश कर रही है।
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