लखनऊ , जुलाई 15 -- उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव भले टल गए हों, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं।

सूत्रों की मानें तो पार्टी ने चुनाव को "प्रधानी की तर्ज" पर लड़ने की रणनीति बनाई है, जिसके तहत जिले से लेकर मंडल, शक्ति केंद्र और बूथ स्तर तक माइक्रो मैनेजमेंट की योजना लागू की जा रही है। लक्ष्य प्रत्येक मतदाता तक पहुंच बनाकर उसे मतदान केंद्र तक लाना है।

पार्टी संगठन ने इसके लिए अभी से जिम्मेदारियां तय करनी शुरू कर दी हैं। सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर चुनावी तैयारियां तेज हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर रहे हैं, जबकि प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर उन्हें चुनावी मोड में ला रहे हैं।

भाजपा के सूत्रों का कहना है कि विधानसभा चुनाव का स्वरूप भले बड़ा हो, लेकिन उसकी रणनीति ग्राम प्रधान के चुनाव जैसी होगी, जिसमें प्रत्येक मतदाता पर व्यक्तिगत स्तर पर ध्यान दिया जाता है। इसी सोच के तहत बूथ स्तर पर पुराने कार्यकर्ताओं और समर्थकों की सूची तैयार कर उन्हें सक्रिय करने का अभियान चलाया जा रहा है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार प्रदेश में सदस्यता अभियान के दौरान दो करोड़ 52 लाख से अधिक लोगों को सदस्य बनाया गया है। भाजपा का आकलन है कि यदि इन सदस्यों और उनके परिवारों को मतदान के दिन बूथ तक पहुंचाने में सफलता मिली तो चुनावी परिणाम पार्टी के पक्ष में रहेंगे।

इसी अभियान को आगे बढ़ाने के लिए 22 जुलाई को प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में बूथ सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इन सम्मेलनों के संयोजक प्रदेश महामंत्री दिलीप पटेल तथा सह-संयोजक शिव भूषण सिंह और राहुल वाल्मीकि बनाए गए हैं।

लोकसभा चुनाव के अनुभवों के बाद भाजपा ने बूथ प्रबंधन, संगठन की सक्रियता और मतदाताओं से सीधे संपर्क को अपनी चुनावी रणनीति का प्रमुख आधार बनाया है।

पार्टी का फोकस प्रत्येक बूथ पर अधिकतम मतदान सुनिश्चित करने और अपने समर्थक मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाने पर रहेगा।

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