मुंबई , अगस्त 01 -- मुंबई की एक अदालत ने विद्याविहार के हिट एंड रन मामले में 17 वर्षीय आरोपी की जमानत रद्द करते हुए नाबालिग न्याय बोर्ड को आरोपी को हिरासत में लेकर बाल सुधार गृह में भेजने के निर्देश दिये हैं।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मुजीबुद्दीन शेख ने पीड़ित ध्रुमिल पटेल की पत्नी मीनल पटेल की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए शुक्रवार को यह आदेश पारित किया।

अदालत ने कहा कि गैर-इरादतन हत्या जैसे गंभीर मामलों में किशोर आरोपी के हितों के साथ-साथ न्याय और पीड़ितों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

पुलिस के अनुसार, यह दुर्घटना पांच फरवरी को विद्याविहार स्थित सोमैया कॉलेज के निकट हुई थी। आरोप है कि किशोर की कार ने परेल से घाटकोपर लौट रहे ध्रुमिल पटेल और उनकी पत्नी मीनल की स्कूटर को टक्कर मार दी थी। ध्रुमिल के सिर में गंभीर चोटें और कई फ्रैक्चर आये थे। उपचार के दौरान 15 फरवरी को उनकी मृत्यु हो गई, जबकि मीनल के दाहिने हाथ और आंख में गंभीर चोटें आयी थीं।

तिलक नगर पुलिस ने किशोर और वाहन के पंजीकृत मालिक उसके पिता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत गैर-इरादतन हत्या, लापरवाही से वाहन चलाने तथा मानव जीवन को खतरे में डालने सहित अन्य आरोपों में मामला दर्ज किया था। किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) ने सात मार्च को आरोपी को जमानत दे दी थी।

मीनल पटेल ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि जेजेबी ने महत्वपूर्ण साक्ष्यों पर विचार नहीं किया। उन्होंने दावा किया कि किशोर तेज और खतरनाक तरीके से वाहन चलाने का आदी था तथा ऐसे वीडियो उसने सोशल मीडिया पर साझा किए थे, जिन्हें दुर्घटना के बाद हटा दिया गया।

याचिका में यह भी कहा गया कि आरोपी के परिवार ने समझौते के लिए पीड़ित परिवार को 40 लाख रुपये की पेशकश की थी। साथ ही मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199ए का हवाला देते हुए कहा गया कि नाबालिग द्वारा वाहन चलाकर किए गए अपराध के लिए अभिभावक या वाहन मालिक भी उत्तरदायी होता है।

अदालत ने जमानत आदेश निरस्त करते हुए किशोर न्याय बोर्ड को आरोपी को हिरासत में लेकर बाल सुधार गृह में भेजने संबंधी आवश्यक आदेश जारी करने का निर्देश दिया।

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