नयी दिल्ली , मई 12 -- दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने मंगलवार को कहा कि उनकी सरकार का उद्देश्य केवल बेहतर परिणाम देना नहीं बल्कि विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए सकारात्मक, सुरक्षित और प्रेरणादायक शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है।

श्री सूद ने आज शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित संवाद कार्यक्रम में सभी प्रिंसिपल्स और हेड ऑफ स्कूल्स से संवाद एवं समन्वय के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता को नयी ऊंचाइयों तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस संवाद कार्यक्रम का उद्देश्य स्कूल स्तर पर आने वाली चुनौतियों को सीधे समझना, शिक्षकों एवं स्कूल प्रशासन के सुझाव प्राप्त करना तथा सरकारी विद्यालयों को आधुनिक, सशक्त और विद्यार्थियों के लिए अधिक अनुकूल बनाना है।

उन्होंने अधिकारियों एवं विद्यालय प्रमुखों से कहा कि दिल्ली सरकार का उद्देश्य केवल बेहतर परिणाम देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए सकारात्मक, सुरक्षित और प्रेरणादायक शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है। उन्होंने स्कूलों में अनुशासन, नियमित उपस्थिति, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों तथा विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ाने पर विशेष बल दिया।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षकों, विद्यालय प्रशासन और अभिभावकों के सामूहिक प्रयास से ही विद्यार्थियों का उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने विद्यालय प्रमुखों से छात्रों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने तथा नवाचार आधारित शिक्षण गतिविधियों को बढ़ावा देने की अपील भी की। शिक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने के लिए हेड ऑफ़ स्कूल, शिक्षक, वाइस प्रिंसिपल, प्रिंसिपल, प्रशासनिक अधिकारी, पेरेंट्स और अन्य सभी सहयोगी महत्वपूर्ण स्टेकहोल्डर्स हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से नुकसान होता है, तो शिक्षा व्यवस्था में कमी पूरे समाज को प्रभावित करती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि सभी अधिकारी और शिक्षक शिक्षा सुधार के कॉमन एजेंडा को पूरी निष्ठा और प्रमाणिकता से लागू करें। उन्होंने कहा कि एक हेड ऑफ़ इंस्टिट्यूशन की प्रशासनिक जिम्मेदारी के साथ-साथ एक जिम्मेदार नागरिक और सरकारी कर्मचारी के रूप में ईमानदारी से कार्य करना भी आवश्यक है।

शिक्षा मंत्री ने बताया कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों के कक्षा 10वीं के परीक्षा परिणामों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। वर्ष 2024-25 में जहां परीक्षा परिणाम 94.57 प्रतिशत था, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 98.53 प्रतिशत हो गया, जो 3.96 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों ने हमेशा देश को योग्य नागरिक, वैज्ञानिक, प्रशासनिक अधिकारी, सेना के अधिकारी और अन्य सफल पेशेवर दिए हैं।

छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को संबोधन का महत्वपूर्ण विषय बताते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान समय मानसिक तनाव का दौर है। स्कूलों को केवल शैक्षणिक परिणामों पर नहीं बल्कि विद्यार्थियों की मानसिक स्थिति, तनाव, विषाद और भावनात्मक समस्याओं की पहचान पर भी ध्यान देना होगा । उन्होंने स्कूल सुरक्षा पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की और कहा कि किसी भी स्कूल में कोई 'डार्क स्पॉट' नहीं होना चाहिए जहाँ किसी प्रकार की अप्रिय या पाशविक घटना की संभावना हो ।

श्री सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य राजधानी के सभी 38,000 क्लासरूम्स को स्मार्ट क्लासरूम में परिवर्तित करना है। उन्होंने बताया कि वर्तमान चरण में लगभग 9,000 स्मार्ट क्लासरूम्स, 175 आईसीटी लैब्स, 100 लैंग्वेज लैब्स तथा 100 डिजिटल लाइब्रेरीज़ विकसित की जा रही हैं। उन्होंने स्कूलों में विषयों की उपलब्धता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि कई स्कूलों में विज्ञान विषय उपलब्ध नहीं है, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों को भी मेडिकल और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में आगे बढ़ने के अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने कहा कि हर बच्चे को विज्ञान पढ़ने का अवसर उपलब्ध कराना सरकार और स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित