फगवाड़ा , सितंबर 19 -- विदेश में लंबे समय से फंसे पंजाब के दो नागरिक राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल के हस्तक्षेप के बाद भारत लौट आए हैं।
तरनतारन निवासी राजिंदरपाल सिंह करीब तीन साल बाद 31 अगस्त को और अमृतसर निवासी जसबीर सिंह करीब आठ महीने बाद तीन सितंबर को स्वदेश पहुंचे।
राजिंदरपाल के परिवार के अनुसार उन्होंने आठ दिसंबर को संत सीचेवाल से संपर्क कर मदद मांगी थी। परिवार का कहना है कि विदेश में सजा पूरी करने के बावजूद दस्तावेज संबंधी समस्याओं के कारण उनकी वापसी में देरी हुई। एक बार हवाई अड्डे से भारत लौटने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी उन्हें वापस जेल भेज दिया गया था। परिवार ने इस दौरान आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना किया तथा एक बच्चे की मौत भी हुई।
भारत लौटने के बाद राजिंदरपाल ने शनिवार को बताया कि वह जिस कंपनी से जुड़े थे, उससे संबंधित ट्रकों में कथित तौर पर कुछ सामान बरामद होने के मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि कंपनी से जुड़े दस्तावेजों के कारण उन्हें लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा। उन्होंने वहां बड़ी संख्या में भारतीयों के फंसे होने का भी दावा किया। संत सीचेवाल के कार्यालय के अनुसार, उनकी अपील के बाद विदेश मंत्रालय और संबंधित भारतीय दूतावास के साथ लगातार संपर्क कर उनकी वापसी का प्रयास किया गया।
अमृतसर निवासी जसबीर सिंह के परिवार ने भी सात जनवरी को संत सीचेवाल से संपर्क किया था। परिवार के अनुसार, संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क के बाद जसबीर तीन सितंबर को भारत लौट आया। दोनों परिवारों ने उनकी वापसी में सहयोग के लिए संत सीचेवाल का आभार जताया।
संत सीचेवाल ने विदेश जाने के इच्छुक युवाओं और उनके परिवारों से एजेंटों तथा बिचौलियों की पूरी जांच-पड़ताल करने और रोजगार एवं यात्रा संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि विदेश जाने की जल्दबाजी में की गई अपर्याप्त जांच युवाओं और उनके परिवारों के लिए गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है।
इस बीच, राजिंदरपाल ने संबंधित भारतीय दूतावास के कामकाज को लेकर कुछ गंभीर आरोप भी लगाए और मामले की जांच की मांग की। उसने दावा किया कि विदेश में मुश्किलों का सामना कर रहे भारतीयों को पर्याप्त सहायता नहीं मिलती तथा कुछ मामलों में मदद के लिए कथित तौर पर धन मांगा गया। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित दूतावास या अधिकारियों का पक्ष उपलब्ध नहीं है।
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