नयी दिल्ली , अगस्त 14 -- केंद्रीय वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने कहा है कि देश भर में बीमा पॉलिसी लेने की गति में वृद्धि के साथ, ग्राहक शिकायत निवारण तंत्र को समझना पॉलिसीधारकों के लिए एक महत्वपूर्ण कौशल बन गया है और कंपनियों के लिए शिकायत निवारण तंत्र बनाने के स्पष्ट निर्देश हैं।
वित्त मंत्रालय ने डीएफएस की ओर से शुक्रवार को जारी एक विज्ञप्ति में कहा कि वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, स्थापित नियामकीय शिकायत निवारण माध्यमों और नवीनतम ग्राहक आंकड़ों की स्पष्ट समझ प्रत्येक पॉलिसीधारक के लिए अत्यंत आवश्यक है। विभाग ने कहा है कि भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने पॉलिसीधारकों की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस और समयबद्ध प्रक्रिया अपनाने के विधिवत निर्देश दिये हैं।
ग्राहक जागरूकता बढ़ाने के लिए विभाग ने ग्रामकों को अनुचित दावा अस्वीकृति, देरी, गलत बिक्री या अन्य सेवा-संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे ग्राहकों को कुछ निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करने की सलाह दी जाती है।
विभाग ने बताया है कि बीमाकर्ता कंपनियों में शिकायत निवारण अधिकारी (जीआरओ) शिकायतों के निपटान के लिए नोडल अधिकारी होता है। उनके प्रत्येक कार्यालय में भी एक अधिकारी को शिकायत निवारण अधिकारी के रूप में नामित करना होता है।
प्रत्येक बीमा कंपनी को शिकायत निवारण के संबंध में एक बोर्ड-स्तरीय समिति बनानी होती है।
बीमाकर्ता के डिजिटल इंटरफेस, सीधे पत्राचार या कॉल सेंटर के माध्यम से प्राप्त प्रत्येक शिकायत बीमाकर्ता की शिकायत प्रबंधन प्रणाली (सीएमएस) में दर्ज की जाती है। बीमाकर्ताओं की शिकायत प्रबंधन प्रणाली और बीमा भरोसा पोर्टल एकीकृत हैं। बीमाकर्ताओं को शिकायत की तत्काल स्वीकृति देनी होती है और 14 दिनों के भीतर उसका समाधान प्रदान करना होता है।
शिकायतकर्ता बीमा भरोसा पोर्टल पर लॉग इन करके अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं और उनके निवारण की प्रक्रिया पर नज़र रख सकते हैं। यह पोर्टल आईआरडीएआई द्वारा बीमा उद्योग में पॉलिसीधारकों की शिकायतों की निगरानी के लिए बनाया गया एकीकृत पोर्टल है। इस पोर्टल पर बीमा कंपनियों के विरूद्ध शिकायत करने वाले पॉलिसीधारकों को सबसे पहले संबंधित बीमा कंपनी के शिकायत निवारण प्रकोष्ठ से संपर्क करना होगा। यदि उन्हें उचित समय सीमा के भीतर जवाब नहीं मिलता है या वे जवाब से असंतुष्ट हैं, तो वे आईआरडीएआई के पॉलिसीधारक संरक्षण एवं शिकायत निवारण विभाग के शिकायत निवारण प्रकोष्ठ से संपर्क कर सकते हैं।
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