भुवनेश्वर , फरवरी 06 -- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को उद्यमियों एवं नवाचार करने वालों (इनोवेटर्स) से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि प्रौद्योगिकी, विशेष रूप से वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक), सामाजिक न्याय तथा समावेशन के एक शक्तिशाली साधन के रूप में कार्य करे और समाज के सबसे वंचित वर्गों तक पहुँचे।

राष्ट्रपति ने ओडिशा सरकार द्वारा ग्लोबल फाइनेंस एंड टेक्नोलॉजी नेटवर्क के सहयोग से आयोजित 'ब्लैक स्वान समिट इंडिया' को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की फिनटेक यात्रा को न केवल तकनीकी प्रगति की कहानी के रूप में, बल्कि लैंगिक न्याय और समावेशी विकास की कहानी के रूप में भी याद किया जाना चाहिए।

श्रीमती मुर्मु ने फिनटेक पारिस्थितिकी तंत्र में महिलाओं की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि महिलाएं एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं जिन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि महिलाओं को न केवल अंतिम उपयोगकर्ता के रूप में देखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें नेताओं, पेशेवरों और उद्यमियों के रूप में भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर नए प्लेटफॉर्म, उत्पाद या नीति का मूल्यांकन इस आधार पर किया जाना चाहिए कि क्या वह महिलाओं को डिजिटल और वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र में सक्रिय भागीदार बनने में सक्षम बनाता है।

राष्ट्रपति ने उल्लेख किया कि केवल फिनटेक ही समावेशन की गारंटी नहीं देता है। कई नागरिक, विशेष रूप से दूरदराज के आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी डिजिटल उपकरणों से परिचित नहीं हैं। ऐसी आबादी को कुशल बनाना उन्हें विकास यात्रा में सक्रिय भागीदार बनाने के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि तभी फिनटेक वास्तव में समावेशन, रोजगार सृजन और उद्यमिता को बढ़ावा देने का इंजन बन सकता है।

श्रीमती मुर्मु ने प्रौद्योगिकी के व्यापक प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसमें अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों और समाज के सभी वर्गों को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने की अपार क्षमता है। तकनीक अभूतपूर्व गति से विकसित हो रही है और नए नवाचार इतनी तेजी से उभर रहे हैं कि व्यवस्था, कौशल और व्यावसायिक मॉडल अक्सर उनके साथ तालमेल बिठाने के लिए संघर्ष करते हैं। उन्होंने यह भी आगाह किया कि तेजी से तकनीकी प्रगति साइबर सुरक्षा खतरों, डीपफेक, गलत सूचना और तकनीक पर बढ़ती निर्भरता सहित गंभीर चुनौतियां भी लाती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि इसके बावजूद इन बदलावों का नवाचार और विकास पर महत्वपूर्ण सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने पिछले दशक के घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने अपनी वित्तीय प्रणाली में एक परिवर्तनकारी क्रांति देखी है। बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण और डिजिटल भुगतान का व्यापक उपयोग किसानों, छोटे दुकानदारों और महिलाओं के बीच आम हो गया है। उनके लिए फिनटेक अब तकनीकी शब्द नहीं बल्कि एक जीवन रेखा है।

श्रीमती मुर्मु ने हालांकि चेतावनी दी कि फिनटेक का कभी-कभी वित्तीय धोखाधड़ी के लिए दुरुपयोग किया जा सकता है। उन्होंने ऐसे अपराधों को रोकने के लिए जन जागरूकता और सतर्कता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने साइबर धोखाधड़ी को रोकने और उसकी रिपोर्ट करने के लिए कई उपाय किए हैं, जिनमें भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र, नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली तथा साइबर धोखाधड़ी शमन केंद्र की स्थापना शामिल है।

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