कबीरधाम/बस्तर , मार्च 24 -- छत्तीसगढ़ में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के कमांडर पापाराव के आत्मसमर्पण को जहां सरकार ने राज्य में सशस्त्र नक्सलवाद का पूर्ण खात्मा बताया है, वहीं प्रदेश कांग्रेस ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए डेडलाइन के बाद आदिवासियों के उत्पीड़न और बस्तर के प्राकृतिक संसाधनों को निजी हाथों में सौंपे जाने की आशंका जताई है। उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी में अब कोई सक्रिय सदस्य नहीं बचा है, जबकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बैज ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है कि आगामी दिनों में आम आदिवासियों को नक्सली बताकर गिरफ्तार तो नहीं किया जाएगा।

पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की बटालियन नंबर एक के कमांडर माड़वी हिड़मा के बाद कमांडर पापाराव अंतिम बड़ा लड़ाका था। पापाराव पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था। उसने बस्तर पुलिस के समक्ष अपने साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है, जिसकी प्रशासनिक स्तर पर औपचारिक घोषणा होना अभी बाकी है। आत्मसमर्पण से पहले गृहमंत्री और पापाराव के बीच मोबाइल पर बातचीत भी हुई। पापाराव उर्फ मंगू (56) सुकमा जिले का निवासी है। वह पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज और दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का सदस्य था। उसके साथ 10 से 12 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जिनमें छह महिलाएं शामिल हैं।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक भारत से नक्सलवाद का समूल नाश कर देने का संकल्प व्यक्त किया था। इसी संदर्भ में अपने गृह जिले कबीरधाम में एक साक्षात्कार के दौरान गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि राज्य में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी में अब कोई सक्रिय सदस्य नहीं बचा है। एरिया कमेटी और पार्टी के सदस्यों ने वर्दी और हथियार त्याग दिए हैं। इस तरह से राज्य में सशस्त्र नक्सलवाद खत्म हो गया है। उन्होंने कहा कि हमारे पास अभी सात दिन का समय शेष है, इस बीच बचे-खुचे छोटे-बड़े कैडरों का आत्मसमर्पण करवा लिया जाएगा। गृहमंत्री ने दावा किया कि केंद्रीय गृहमंत्री का संकल्प छत्तीसगढ़ में पूरा हो गया है और अब ऐसी स्थिति बन गई है कि राज्य में नक्सलवाद की सशस्त्र गतिविधियां पूर्ण रूप से समाप्त हो चुकी हैं।

वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बैज ने सरकार के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह बस्तर से आते हैं। नक्सलवाद का सबसे ज्यादा दंश कांग्रेस ने झेला है, वरिष्ठ नेताओं की एक पूरी पीढ़ी की कथित तौर पर नक्सलियों ने हत्या की है। कांग्रेस भी चाहती है कि नक्सलवाद का खात्मा हो। उन्होंने कहा, "सरकार के नक्सलवाद खात्मे के दावों के बीच हम सरकार से यह पूछना चाहते हैं कि डेडलाइन की तारीखों के बाद आम आदिवासियों को नक्सली बताकर गिरफ्तार तो नहीं किया जाएगा? नक्सलवाद के खात्मे के साथ ही बस्तर के जल, जंगल, जमीन कहीं निजी हाथों में सौंप देने की कोई तैयारी तो नहीं है? ये हमारे सवाल हैं, जिसका जवाब सरकार नहीं दे रही है।"उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों के समन्वित अभियान और विकास कार्यों के चलते बस्तर क्षेत्र में नक्सली संगठन की सक्रियता लगातार घटी है। पापाराव के आत्मसमर्पण के साथ ही अब इस क्षेत्र में शांति स्थापित होने की उम्मीद जताई जा रही है, हालांकि विपक्ष ने सरकार की उपलब्धियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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