चेन्नई , जुलाई 19 -- तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने रविवार को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सम्मान प्राप्त करने वाली तमिल 10 फिल्मी हस्तियों को बधाई देते हुए इस उपलब्धि को तमिल फिल्म उद्योग और राज्य के लिए गर्व का क्षण बताया।

In a statement, the Chief Minister extended his appreciation and best wishes to all the award winners, expressing confidence that Tamil cinema would continue to scale greater heights and earn more national and international recognition in the years to come.श्री विजय ने सभी पुरस्कार विजेताओं की सराहना की और उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में तमिल सिनेमा और ऊंचाइयां हासिल करेगा और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक ख्याति प्रापित करेगी।

वर्ष 2024 में रिलीज हुई फिल्मों के लिए घोषित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में तमिल सिनेमा ने कई प्रमुख श्रेणियों में शानदार प्रदर्शन किया।

मुख्यमंत्री ने तमिल सिनेमा द्वारा 10 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतने को एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि ये सम्मान राज्य की फिल्म बिरादरी की रचनात्मकता, प्रतिभा और तकनीकी उत्कृष्टता को दर्शाते हैं। उन्होंने सभी विजेताओं के लिए निरंतर सफलता की कामना की और उम्मीद जताई कि भविष्य में तमिल सिनेमा और भी कई प्रतिष्ठित पुरस्कार जीतेगा।

जाने-माने निदेशक राजकुमार पेरियासामी की फिल्म 'अमरन्' ने निर्देशन, पार्श्व संगीत और संपादन में बड़े पुरस्कार जीतकर बड़ी कामयाबी हासिल की। इसमें शिवकार्तिकेयन ने सैन्य अधिकारी मेजर मुकुंद पद्मनाभन की असल जिंदगी की कहानी को पर्दे पर उतारा है।

उल्लेखनीय है कि 'अमरन' भारतीय सेना की राजपूत रेजिमेंट के कमीशन प्राप्त अधिकारी मेजर मुकुंद वरदराजन की असल जिंदगी की कहानी है। उन्हें जम्मू-कश्मीर में 44वीं राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन में प्रतिनियुक्ति के दौरान आतंकवाद-रोधी अभियान में बहादुरी दिखाने के लिए मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था। शिवकार्तिकेयन और साई पल्लवी जैसे कलाकारों वाली 'अमरन' को देशभक्ति के विषय और भावनात्मक गहराई के लिए काफी सराहा गया है। कई राष्ट्रीय सम्मान जीतने के साथ इस फिल्म ने साल की सबसे अहम तमिल फिल्मी उपलब्धियों में अपनी जगह पक्की कर ली है, जबकि 'महाराजा' और 'रायन' को भी अलग-अलग श्रेणी में पहचान मिली।

राजकुमार पेरियासामी ने श्रेष्ठ निर्देशन का सम्मान जीता। जूरी ने इसे 'दिल को छू लेने वाला जीवनी आधारित युद्ध नाटक' बताया, जिसमें जबरदस्त एक्शन और भावनात्मक गहराई का बेहतरीन मेल है।

जूरी के अध्यक्ष जयराज ने कहा कि यह फिल्म एक असली सैनिक और उनके परिवार की हिम्मत और कुर्बानी को दिल से श्रद्धांजलि देती है। यह युद्ध के मैदान और मानवीय कहानी दोनों को ही समान असर के साथ दिखाती है।

संगीतकार जीवी प्रकाश कुमार ने 'सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन (पृष्ठभूमि संगीत) का सम्मान जीता। यह उनका तीसरा राष्ट्रीय सम्मान है। जूरी ने फिल्म की भावनात्मक गहराई को बढ़ाने और कहानी कहने के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए उनकी सराहना की।

प्रकाश ने इस सम्मान के लिए 'बेहद विनम्र और आभारी' महसूस करते हुए जूरी, फिल्म की टीम और निर्माता कमल हासन का शुक्रिया अदा किया।

संपादक आर. कलाईवानन को सर्वश्रेष्ठ संपादन के लिए सम्मानित किया गया। जूरी ने उनकी 'रफ़्तार, कहानी के बहाव और भावनात्मक गहराई को बेहतरीन ढंग से गढ़ने की कला' की सराहना की। फिल्म के संपादन की सराहना इसलिए हुई क्योंकि इसने फिल्म की कहानी कहने की लय को बनाए रखते हुए मुश्किल एक्शन दृश्य को बहुत अच्छे से जोड़ा।

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