बल्लारी , सितंबर 07 -- कर्नाटक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष विजयेंद्र येदियुरप्पा ने सूखे से प्रभावित तालुकों की घोषणा को लेकर कांग्रेस सरकार पर अपना हमला तेज कर दिया है।
उन्होंने सोमवार को आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में भेदभाव और राजनीतिक कारणों को ध्यान में रखा गया है जबकि किसान सूखे की बिगड़ती स्थिति का खामियाजा भुगत रहे हैं। लगभग 190 से ज़्यादा तालुकों में सूखे जैसे हालात होने के बावजूद सरकार का सिर्फ़ 101 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित करने का फ़ैसला, सरकार के आकलन और राहत उपायों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उनका यह हमला कांग्रेस विधायक सीएस अप्पाजी नाडागौडा के उस आरोप के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके मुड्डेबिहाल विधानसभा क्षेत्र के दो तालुकों को जानबूझकर सूखाग्रस्त सूची से बाहर रखा गया है। उन्होंने विजयपुरा ज़िले के प्रभारी मंत्री एमबी पाटिल पर निजी दुश्मनी के कारण ऐसा करने का आरोप लगाया।
श्री विजयेंद्र ने कहा, "चाहे राजनीतिक या निजी मतभेद कुछ भी हों, सरकार किसानों के साथ भेदभाव नहीं कर सकती, खासकर तब जब उनकी आजीविका दांव पर हो।"उन्होंने कहा कि नाडागौडा के आरोप ने भाजपा के उस दावे को और मज़बूत कर दिया है कि सरकार सूखाग्रस्त इलाकों की पहचान करने में पारदर्शी और एकसमान तरीका अपनाने में नाकाम रही है।
भाजपा के राज्य प्रमुख ने श्री पाटिल पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि वे अपनी ही पार्टी के विधायक की चिंताओं पर ध्यान देने के बजाय मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "कांग्रेस विधायक और मंत्री के बयानों ने सरकार के अंदरूनी मतभेदों को उजागर कर दिया है। ऐसे समय में जब किसान संघर्ष कर रहे हैं, सरकार आपस में ही लड़ने में व्यस्त है।"श्री विजयेन्द्र ने मांग की कि सरकार तुरंत सूखे के आकलन की समीक्षा करे और यह सुनिश्चित करे कि बिना किसी राजनीतिक भेदभाव के, वास्तव में प्रभावित तालुकों को सूखा-राहत ढांचे के दायरे में लाया जाए। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि सूखा-प्रभावित किसानों की लगातार अनदेखी से जनता में व्यापक आक्रोश फैल सकता है।
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