नयी दिल्ली , जून 25 -- विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने विखंडित विश्व को मौजूदा समय की वास्तविकता बताते हुए कहा है कि इससे एकाधिकार कम हो सकता है और अवसरों का विस्तार हो सकता है लेकिन साथ ही आगाह किया कि स्थिरता, दक्षता और सुरक्षा के लिए इसके जोखिमों से निपटने के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है।

श्री जयशंकर ने गुरुवार को दक्षिण कोरिया में जेजू शांति और समृद्धि मंच 2026 को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया एकीकरण और विभाजन के जटिल मिश्रण का अनुभव कर रही है, जिसे आपूर्ति श्रृंखलाओं, प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा महामारी, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसी सीमा-पार चुनौतियां प्रभावित कर रही हैं।

उन्होंने तर्क दिया कि रणनीतिक प्रतिस्पर्धा व्यापार, प्रौद्योगिकी, वित्त और संपर्क व्यवस्था को तेजी से प्रभावित कर रही है, जबकि राजनीतिक दबाव और संरक्षणवादी प्रवृत्तियां वैश्वीकरण को कमजोर कर रही हैं।

विदेश मंत्री ने आतंकवाद पर "दोहरे मानदंडों", जलवायु कार्रवाई पर "खोखले वादों" तथा विकासशील देशों के औद्योगीकरण और बाजार तक पहुंच को सीमित करने वाले प्रतिबंधों की भी आलोचना की।

बढ़ते हुए सशस्त्रीकरण, अधिक जोखिम उठाने की प्रवृत्ति और तीव्र होती भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की चेतावनी देते हुए श्री जयशंकर ने कहा कि जब प्रमुख शक्तियां संकीर्ण हितों का पीछा करती हैं, तब विकासशील देशों पर पड़ने वाली लागतों की अक्सर अनदेखी की जाती है।

विखंडित विश्व में सहयोग को पुनर्परिभाषित करने के लिए उन्होंने पाँच प्राथमिकताएँ सुझाई जिनमें आपूर्ति श्रृंखलाओं का विविधीकरण, प्रभावशाली देशों के बीच नई साझेदारियों का निर्माण, अंतरराष्ट्रीय कानून और संस्थाओं को सुदृढ़ करना, वैश्विक दक्षिण के लिए अवसरों का विस्तार करना तथा सुधारित बहुपक्षवाद को आगे बढ़ाना शामिल है।

श्री जयशंकर ने पोत निर्माण, डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, अवसंरचना और रक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारत-दक्षिण कोरिया सहयोग को और निकट बनाने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मजबूत द्विपक्षीय संबंध वैश्विक स्थिरता और विकास में योगदान देंगे।

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