भागलपुर, फरवरी 28 -- बिहार के भागलपुर जिले में अवस्थित प्राचीन एवं पुरातात्विक स्थल "विक्रमशिला महाविहार" के विकास के लिए एनटीपीसी कहलगांव ने शनिवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और राष्ट्रीय संस्कृति कोष के साथ दो करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिये एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया है।

आधिकारिक सूत्रों ने आज यहां बताया कि जिले के कहलगांव स्थित एनटीपीसी के विधुत परियोजना के सभागार में विक्रमशिला महाविहार के संरक्षण एवं विकास कार्यों के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर एवं आदान-प्रदान परियोजना प्रमुख रविन्द्र पटेल और राष्ट्रीय संस्कृति कोष के संरक्षण निदेशक सुंदर पॉल के बीच एनटीपीसी एवं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

सूत्रों ने बताया कि इस समझौता ज्ञापन के तहत कहलगांव विधुत परियोजना अपने नैगम सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के बाबत दो करोड़ रुपए राशि से विक्रमशिला महाविहार के पास कैफेटेरिया एवं आगंतुक कक्ष का निर्माण,आगंतुकों के लिये पार्किंग सुविधा का विकास, शौचालय ब्लॉक एवं पेयजल सुविधाओं की व्यवस्था के साथ साथ इस महाविहार का संरक्षण एवं पुनर्स्थापन किया जाएगा।

सूत्रों ने बताया कि यह पहल एनटीपीसी के कहलगांव परियोजना की अपनी नैगम सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत देश की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। जिले के कहलगांव अंचल के अंतीचक गांव के पास अवस्थित ऐतिहासिक एवं पुरातत्विक स्थल "विक्रमशिला महाविहार" प्राचीन भारत का एक प्रमुख शिक्षा केन्द्र रहा है और यहां देश- विदेश के छात्र रहकर शिक्षा ग्रहण करते थे। वर्तमान समय में यह स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीन है। इस महाविहार (प्राचीन शिक्षा केन्द्र)की स्थापना बीसवीं शताब्दी में पाल वंश के राजा धर्मपाल ने की थी। विक्रमशिला महाविहार बिहार का एक प्रमुख पर्यटन स्थल बना हुआ है और देश एवं विदेश के हजारों पर्यटक यहां पहुंचते हैं।

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