चंडीगढ़ , मई 25 -- हरियाणा सेवा अधिकार आयोग ने फरीदाबाद में भूखंड पर कब्जे में देरी के मामले में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है और आयोग ने विकास कार्य पूरे होने से पहले ही ई-नीलामी करने पर नाराजगी जताई।

मामला फरीदाबाद के सेक्टर-89 स्थित प्लॉट संख्या 47 का है। यह भूखंड ई-नीलामी में आयुष कटारिया को आवंटित हुआ था। आवंटी ने शिकायत में बताया कि नवंबर 2023 में पूरी राशि और औपचारिकतायें पूरी करने के बावजूद अभी तक कब्जा नहीं मिला। कब्जे की कोई समयसीमा भी नहीं बतायी गयी।

एचएसवीपी, फरीदाबाद के एस्टेट ऑफिसर-II ने रिपोर्ट में कहा कि साइट पर विद्युतीकरण का काम लंबित होने से कब्जा नहीं दिया जा सका। जल आपूर्ति, सीवरेज और सड़क निर्माण पूरा हो चुका है। लंबित कार्यों के कारण पहले दिया गया कब्जा प्रस्ताव वापस ले लिया गया। विलंबित कब्जे पर ब्याज देने की प्रक्रिया शुरू की गयी है। विद्युतीकरण पूरा होने के बाद नया कब्जा प्रस्ताव जारी होगा।

आयोग ने कहा कि भूखंडों की ई-नीलामी से पहले विकास कार्य पूरे होने चाहिए, ताकि आवंटियों को असुविधा न हो। नागरिक विश्वास के साथ निवेश करते हैं और समय पर बुनियादी ढांचा मिलने की उम्मीद रखते हैं। देरी की स्थिति में आवंटी ब्याज का हकदार है।

आयोग ने निर्माण लागत बढ़ने और वित्तीय बोझ को देखते हुए एचएसवीपी को आयुष कटारिया को 15 दिनों में 5,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। पांच जून 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट मांगी गयी है। हरियाणा सेवा अधिकार अधिनियम, 2014 के तहत आयोग 5,000 रुपये तक ही मुआवजा दे सकता है।

आयोग ने स्पष्ट किया कि आवंटी अतिरिक्त मुआवजे के लिए उपभोक्ता आयोग या उच्च न्यायालय जा सकता है। आयोग ने उम्मीद जताई कि शेष औपचारिकताएं जल्द पूरी कर कब्जा सौंपा जाएगा।

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