नयी दिल्ली , सितंबर 13 -- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग विदेश मंत्रालय के साथ मिल कर दक्षिणी गोलार्ध के विकासशील देशों के राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों की क्षमता और दक्षता बढ़ाने के लिए मानवाधिकार पर छह दिन का भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) कार्यक्रम आयोजित करेगा।
आयोग की रविवार को जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि कार्यक्रम का उद्देश्य मानवाधिकार के विभिन्न पहलुओं और अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोणों की जानकारी देना तथा प्रतिभागियों में जागरूकता बढ़ाने के लिए भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अनुभव साझा करना है। यह कार्यक्रम 14 से 19 सितंबर तक राजधानी में होगा।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थानों की क्षमता मजबूत करना और अनुभवों तथा अच्छी कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है, ताकि संबंधित देशों में मानवाधिकारों के संरक्षण और संवर्धन के लिए सहयोग को प्रोत्साहित किया जा सके।
यह कार्यक्रम प्रतिभागी संस्थानों की जरूरतों और आयोग द्वारा आयोजित पिछले चार आईटीईसी क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के दौरान मिले सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें 15 राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थानों के 41 वरिष्ठ अधिकारियों के शामिल होने की उम्मीद है।
कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार ढांचे का विकास, समकालीन मानवाधिकार मुद्दे, मानवाधिकार और व्यापार, मानवाधिकारों पर नई प्रौद्योगिकी का प्रभाव तथा सतत विकास जैसे विषय शामिल होंगे। प्रतिभागियों को वैश्विक मानवाधिकार विमर्श के संदर्भ में भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के कामकाज की जानकारी दी जाएगी। इसमें शिकायत प्रबंधन और जांच की व्यवस्थाएं भी शामिल हैं।
तीन दशकों से अधिक के अनुभव के आधार पर, यह कार्यक्रम वैश्विक दक्षिण के देशों में मानवाधिकारों की पैरवी, प्रभावी कार्यान्वयन और संस्थागत मजबूती के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थानों के बीच आपसी सीख और सार्थक सहयोग को बढ़ावा देगा। क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाले प्रतिष्ठित व्यक्ति संसाधन विशेषज्ञ के रूप में योगदान देंगे।
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