चंडीगढ़ , जून 08 -- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि 'विकसित भारत' केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकल्प है, जिसकी सफलता के लिए प्रत्येक नागरिक और संस्था की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नीतियों, योजनाओं और बजटीय प्रावधानों का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक सकारात्मक बदलाव पहुंचाना होना चाहिए।

हरियाणा विधानसभा में आयोजित राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) इंडिया रीजन जोन-2 (उत्तर जोन) सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत एक स्थिर, मजबूत और सुदृढ़ कानूनी ढांचे के बल पर निरंतर प्रगति कर रहा है। बदलते वैश्विक परिदृश्य और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद देश दीर्घकालिक नीतियों और सुशासन के आधार पर आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत की युवा आबादी देश की सबसे बड़ी शक्ति है। विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए युवाओं को कौशल विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नवाचार से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि विधानसभाओं में बनाए जाने वाले कानून और नीतियां नई पीढ़ी की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं के अनुरूप होनी चाहिए।

उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि सदनों की चर्चाएं और कानून राष्ट्रीय हित से प्रेरित होने चाहिए। ग्राम पंचायत से लेकर संसद तक नागरिकों की भागीदारी बढ़ने से नए विचार और रचनात्मक सुझाव सामने आते हैं, जिससे विकास को गति मिलती है।

सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के विधानसभा अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम से पूर्व लोकसभा अध्यक्ष ने हरियाणा विधानसभा भवन में नव स्थापित संसदीय अनुसंधान एवं सूचना केंद्र (पीआरआईसी) का उद्घाटन भी किया। सम्मेलन में 'विकसित भारत-2047', जनभागीदारी और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका जैसे विषयों पर मंथन किया जा रहा है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित