चम्पावत , जुलाई 28 -- विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर मंगलवार को चंपावत जिला सभागार में पंच सम्मेलन कार्यशाला आयोजित की गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह अधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यशाला में योजना के सफल क्रियान्वयन, विभागीय समन्वय और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यशाला में जिले की चार मुख्य श्रेणियों और 29 उप-श्रेणियों के अंतर्गत करीब 318 विकास परियोजनाओं एवं योजनाओं की रूपरेखा तैयार कर उन पर बिंदुवार मंथन किया गया।

जिला पंचायत अध्यक्ष ने जनप्रतिनिधियों से ग्राम स्तर पर मजबूत, व्यावहारिक और जनहितकारी प्रस्ताव तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास की योजनाएं समावेशी दृष्टिकोण के साथ तैयार की जानी चाहिए ताकि समाज के प्रत्येक वर्ग को उनका लाभ मिल सके।

श्री अधिकारी ने पारंपरिक विकास कार्यों के साथ ही स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप नए और नवाचारी कार्यों को भी कार्ययोजना में प्राथमिकता से शामिल करने पर जोर दिया।

परियोजना निदेशक अजय सिंह ने अधिनियम के प्रावधानों, मनरेगा और आजीविका मिशन के तहत संचालित विभिन्न घटकों तथा संबंधित विभागों की योजनाओं के समन्वय की प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जल संरक्षण एवं संवर्धन, भूमि सुधार व समतलीकरण, ग्रामीण संपर्क मार्गों का निर्माण, पौधरोपण, पशु शेड, नाली निर्माण, व्यक्तिगत परिसंपत्तियों का विकास तथा स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।

उन्होंने जनप्रतिनिधियों और महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों से योजना को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए अपने सुझाव देने की अपील की। कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने अपनी-अपनी योजनाओं की जानकारी भी साझा की, ताकि विभागीय योजनाओं के समन्वय से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सके।

कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख चम्पावत अंचला बोहरा, ब्लॉक प्रमुख बाराकोट सीमा आर्या, सहायक परियोजना निदेशक विम्मी जोशी, जिला विकास अधिकारी दिनेश सिंह दिगारी, सभी खंड विकास अधिकारी, जिला स्तरीय अधिकारी, त्रिस्तरीय पंचायतों के जनप्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूहों की सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

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