पटना , सितम्बर 27 -- दिल्ली के उपराज्यपाल एवं पूर्व राजनयिक तरनजीत सिंह संधू ने रविवार को कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में कूटनीति केवल देशों के बीच संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास, निवेश, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, कौशल और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।

श्री संधू ने आज बिहार लोक भवन, पटना में 'पटलीपुत्र प्रज्ञा प्रवाह' के तहत 'डिप्लोमेसी ऐज ए कैटलिस्ट फुएलिंग थे विजन ऑफ़ विकसित भारत' विषय पर आयोजित व्याख्यान को संबोधित करते हुए कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में कूटनीति एक प्रभावी उत्प्रेरक की भूमिका निभा सकती है।

दिल्ली के उपराज्यपाल ने पूर्व राजनयिक के रूप में अपने अनुभवों का उल्लेख करते हुए वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका, बदलती विश्व व्यवस्था तथा विभिन्न देशों के साथ सहयोग की संभावनाओं पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज के दौर में आर्थिक और तकनीकी सहयोग भी कूटनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। शिक्षा, कौशल, नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से युवाओं को वैश्विक अवसरों से जोड़ना भारत की विकास यात्रा को नई गति दे सकता है।

श्री संधू ने कहा कि भारत की ताकत उसकी युवा आबादी, प्रतिभा, लोकतांत्रिक संस्थाओं, उद्यमशीलता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में है। इन क्षमताओं को वैश्विक साझेदारियों से जोड़कर भारत आर्थिक विकास के साथ-साथ ज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में भी अपनी भूमिका को और मजबूत कर सकता है।

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