नयी दिल्ली , जून 17 -- केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यों से केंद्र सरकार की श्रेष्ठ प्रशासनिक और सुशासन संबंधी पहलों को अपनाने का आह्वान किया है।

डॉ. सिंह ने बुधवार को यहां "कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय की 12 वर्षों की उपलब्धियां" विषय पर संवाददाता सम्मेलन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रशासनिक सुधार अब केवल सरकारी प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन के प्रभावी साधन बन गये हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में कार्मिक प्रशासन, प्रशासनिक सुधार और पेंशन कल्याण से जुड़े विभागों की कार्यशैली और पहचान में व्यापक बदलाव आया है। आज ये विभाग नवाचार, सुधार और नागरिक-केंद्रित शासन के प्रमुख प्रेरक बन चुके हैं।

उन्होंने राज्यों से केंद्र सरकार की श्रेष्ठ प्रशासनिक और सुशासन संबंधी पहलों को अपनाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि मिशन कर्मयोगी, सीपीजीआरएएमएस, डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट और अन्य प्रौद्योगिकी आधारित प्रशासनिक प्रणालियों ने शासन व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता को बढ़ाया है तथा नागरिकों का विश्वास मजबूत किया है। इन मॉडलों को राज्यों में व्यापक रूप से लागू कर विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को तेजी से हासिल किया जा सकता है।

डॉ. सिंह ने बताया कि सरकार की नीतियां नवाचार, कल्पनाशीलता और समावेशन के तीन मूल सिद्धांतों पर आधारित रही हैं। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों के स्व-सत्यापन की व्यवस्था, ग्रुप 'बी' और ग्रुप 'सी' पदों के लिए साक्षात्कार समाप्त करना तथा आधार आधारित सत्यापन और कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं जैसी व्यवस्थाओं ने भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय रोजगार मेला के माध्यम से अक्टूबर 2022 से अब तक 19 कार्यक्रमों में 12 लाख से अधिक नियुक्ति पत्र वितरित किए जा चुके हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लोक शिकायत निवारण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। जहां पहले सालाना लगभग दो लाख शिकायतें दर्ज होती थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर करीब 25 लाख हो गयी है, जो व्यवस्था पर जनता के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है। इसके साथ ही शिकायतों के निस्तारण का औसत समय 157 दिनों से घटकर केवल 13 दिन रह गया है।

पेंशन सुधारों का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट और फेस रिकग्निशन तकनीक ने वरिष्ठ पेंशनभोगियों को बड़ी राहत दी है। इसके अलावा पेंशन अदालत, पेंशन शिकायत निवारण तंत्र और 'अनुभव' मंच जैसी पहलों ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के अनुभवों को संस्थागत ज्ञान में बदलने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि विश्वास, तकनीक और नागरिक-प्रथम दृष्टिकोण पर आधारित सुशासन भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की मजबूत नींव प्रदान कर रहा है।

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