जयपुर , मई 09 -- राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे ने विकसित भारत के संकल्प को विरासत के संरक्षण से जुड़ा हुआ बताते हुए कहा है कि भौतिक विकास की सार्थकता तभी है जब हम अपनी महान परंपराओं और महापुरुषों के जीवन आलोक से जुड़े रहें।
श्री बागडे शनिवार को द हिंदू फाउंडेशन, नागपुर द्वारा आयोजित शौर्यांजलि कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम विकसित भारत विरासत के आलोक में महाराणा प्रताप की जयंती और 1857 की क्रांति की वर्षगांठ पर आयोजित किया गया था।उन्होंने मंगल पांडे, खुदीराम बोस, अनन्त काने और देश के लिए अपना सर्वस्व होम करने वाले स्वाधीनता सेनानियों का स्मरण करते हुए कहा कि आजादी के लिए देशभर से आंदोलन हुए तब देश स्वतंत्र हुआ। उन्होंने विश्वकवि रविन्द्र नाथ ठाकुर को भी उनकी जयंती पर नमन करते उनके योगदान को याद किया।
श्री बागडे ने कहा कि महाराणा प्रताप देश के पहले ऐसे स्वाधीनता सेनानी थे जिन्होंने मातृभूमि के लिए संघर्ष ही नहीं किया मुगलों को निरंतर टक्कर दी। उन्होंने राणा प्रताप के महान जीवन और उनके चेतक घोड़े से जुड़े प्रेरक अनछुए प्रसंगों को साझा करते हुए कहा कि "अक़बरनामा" में जो लिखा गया, वह इतिहास का पूरा सच नहीं है। सच का झूठ वहां बहुत है। उन्होंने बीकानेर की किरण देवी द्वारा अकबर ने नौ रोज के मेले में उनकी आबरू के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश करने पर अपनी कटार उसकी गर्दन पर रखकर अपने प्राणों की भीख मांगने पर मजबूर करने के इतिहास प्रसंग का भी उल्लेख किया।
राज्यपाल ने कहा कि भारत के स्वर्णिम गौरव का इतिहास अभी लिखा जाना है। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप सोलहवीं शताब्दी के महानायक थे। सत्रहवीं शताब्दी के महान गौरव शिवाजी थे। इससे पहले राज्यपाल ने चंद्रशेखर आजाद के वंशज अमित आजाद का अभिनंदन भी किया।
इस अवसर पर विधायक गोपाल शर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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