मिर्जापुर , अक्टूबर 10 -- मिर्जापुर में प्रसिद्ध विंध्याचल नवरात्र मेले के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा और व्यवस्थागत इंतजाम किए हैं। मां विंध्यवासिनी मंदिर के गर्भगृह में चरण स्पर्श और फोटोग्राफी पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। ये नियम वीआईपी व्यक्तियों पर भी लागू होंगे। मंदिर में पुरोहितों, पंडों और नाइयों के लिए ड्रेस कोड निर्धारित किया गया है। सफाई व्यवस्था में लगे कर्मचारियों को भी निर्धारित परिधान में रहना होगा।
मेलाधिकारी अविनाश कुमार ने बताया कि मेले के दौरान निर्धारित नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। दुकानदारों के लिए रेट लिस्ट लगाना अनिवार्य किया गया है। वहीं, पार्किंग स्थलों पर वाहनों से मनमाना शुल्क वसूलने पर रोक लगाने के लिए पार्किंग दरें भी निर्धारित की गई हैं। रविवार भोर से शुरू होने वाले नौ दिवसीय नवरात्र मेले की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
मेले की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) को भी सौंपी गई है। पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी सीसीटीवी कैमरों, एआई कैमरों और ड्रोन के माध्यम से की जाएगी। सुरक्षा के लिए अर्धसैनिक बलों, क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के जवानों समेत तीन हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। इनके अतिरिक्त होमगार्ड, पीआरडी, यातायात पुलिस और अग्निशमन विभाग के जवान भी ड्यूटी पर रहेंगे। बम निरोधक दस्ते और जल पुलिस को भी आधुनिक उपकरणों के साथ मुस्तैद रखा जाएगा।
जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार ने बताया कि पूरे मेला क्षेत्र को 10 जोन और 21 सेक्टरों में बांटा गया है। प्रत्येक जोन और सेक्टर में जोनल तथा सेक्टर मजिस्ट्रेटों की तैनाती की गई है। मेला क्षेत्र में जरूरत से ज्यादा भीड़ एकत्र होने से रोकने के लिए जगह-जगह बैरियर लगाए गए हैं।
पुलिस अधीक्षक अर्पणा कौशिक ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था में अर्धसैनिक बलों और सिविल पुलिस के साथ जल पुलिस, यातायात पुलिस, घुड़सवार पुलिस तथा खुफिया एजेंसियों के जवान भी तैनात रहेंगे। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अलग से व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि इस बार एटीएस के जवान पूरे नवरात्र मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगे। अतिसंवेदनशील स्थानों पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
श्रद्धालुओं के साथ विनम्र व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए मेले में तैनात सुरक्षा कर्मियों और अन्य कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। उन्हें साफ-सुथरी वर्दी में अनुशासित रहकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने तथा दर्शनार्थियों के साथ सद्भावपूर्ण व्यवहार करने की शपथ भी दिलाई गई है।
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