बेंगलुरु , अगस्त 31 -- कर्नाटक के मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे के बावजूद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से रायचूर के लिंगसुगुर से बल्लारी तक 10 दिवसीय पदयात्रा जारी रखने का फैसला संकेत देता है कि पार्टी का लक्ष्य अब केवल वाल्मीकि निगम मामले तक सीमित नहीं है और वह इस विवाद को राज्य में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदायों की व्यापक समस्याओं और शिकायतों से जोड़कर राजनीतिक लामबंदी का रूप देने की तैयारी में है।

भाजपा की पदयात्रा एक सितंबर से शुरू होकर 10 सितंबर को बल्लारी में समाप्त होगी। इसे पहले श्री नागेंद्र के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित किया जाना था, लेकिन उनकी ओर से पद छोड़ने के बाद पार्टी ने इसका एजेंडा विस्तृत कर दिया है। अब इसमें अनुसूचित जनजातियों के लिए निर्धारित धन के कथित दुरुपयोग, एससी-एसटी से जुड़े मुद्दों, लंबित कल्याणकारी भुगतान, क्षेत्र के विकास और कांग्रेस सरकार की कथित विफलताओं को शामिल किया गया है।

भाजपा वाल्मीकि निगम मामले में कथित तौर पर 187 करोड़ रुपये के धन के दुरुपयोग का मुद्दा प्रमुखता से उठायेगी। पार्टी यह सवाल भी उठायेगी कि अब तक कितनी राशि बरामद हुई है और शेष धनराशि का पता क्यों नहीं लगाया गया। इसके अलावा पूरे मामले के लिए जिम्मेदार लोगों और कथित घोटाले के मुख्य सूत्रधार की पहचान तथा उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की जायेगी।

पार्टी एससी-एसटी समुदायों के लिए निर्धारित लाभों पर कथित रोक और कल्याण कर्नाटक के विकास से जुड़े मुद्दों को भी अभियान का हिस्सा बनाएगी। गृह लक्ष्मी योजना के करीब 5,000 करोड़ रुपये के लंबित भुगतान का मुद्दा भी पदयात्रा के दौरान प्रमुखता से उठाए जाने की संभावना है।

पदयात्रा का राजनीतिक महत्व इसके मार्ग से भी जुड़ा है। भाजपा इसे नौ विधानसभा क्षेत्रों से होकर ले जायेगी। इस तरह यह अभियान बेंगलुरु तक सीमित विपक्षी प्रदर्शन के बजाय कल्याण कर्नाटक में व्यापक क्षेत्रीय राजनीतिक लामबंदी का रूप लेगा।

भाजपा की योजना प्रतिदिन करीब 10,000 लोगों को जुटाने की है। जिन विधानसभा क्षेत्रों से पदयात्रा गुजरेगी, वहां एससी-एसटी समुदायों से आने वाले वर्तमान और पूर्व विधायकों को भी अभियान में शामिल किया जायेगा। इससे स्पष्ट है कि भाजपा तत्काल वाल्मीकि प्रकरण से आगे बढ़कर कल्याण कर्नाटक में एससी-एसटी मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने का प्रयास कर रही है।

यह अभियान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि श्री नागेंद्र बल्लारी ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और उन्होंने 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा नेता बी. श्रीरामुलु को हराया था। अब श्रीरामुलु और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र अभियान के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं।

भाजपा का राजनीतिक विमर्श भी अब 'नागेंद्र को हटाओ' से आगे बढ़कर "पैसा कहां गया, किसे मिला और जवाबदेह कौन है" पर केंद्रित होता दिख रहा है। पार्टी कथित रूप से दुरुपयोग की गयी पूरी राशि की बरामदगी और पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की मांग कर रही है।

इस बीच भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन के बीच समन्वय को लेकर भी सवाल उठे हैं। भाजपा नेताओं ने संकेत दिया है कि जिन क्षेत्रों में जद(एस) का प्रभाव है, वहां उसके नेता पदयात्रा को समर्थन दे सकते हैं। हालांकि केंद्रीय मंत्री और जद(एस) नेता एच. डी. कुमारस्वामी के पदयात्रा के अधिकांश कार्यक्रमों में शामिल होने की संभावना नहीं है। वह अमेरिका की यात्रा पर रहने वाले हैं और 12 सितंबर को लौटने की संभावना है।

श्री कुमारस्वामी ने कहा था कि उन्हें पदयात्रा की जानकारी नहीं थी और श्री नागेंद्र के इस्तीफे के बाद इसके आयोजन की जरूरत पर भी सवाल उठाया था। इसके जवाब में भाजपा नेताओं ने कहा कि विजयेंद्र येदियुरप्पा और विपक्ष के नेता आर. अशोक ने उनसे बात कर कार्यक्रम की जानकारी दी थी। बाद में श्री कुमारस्वामी ने संकेत दिया कि जद(एस) नेता भाजपा के अभियान को सांकेतिक समर्थन दे सकते हैं। दोनों सहयोगी दलों के अलग-अलग बयानों ने समन्वय को लेकर सवाल जरूर खड़े किये हैं, लेकिन भाजपा पदयात्रा को कांग्रेस सरकार के खिलाफ बड़े विपक्षी अभियान के रूप में पेश करने की तैयारी में है।

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