रांची , अगस्त 20 -- झारखंड के वामदलों-भाकपा, माकपा, भाकपा (माले) लिबरेशन, एसयूसीआई (सी) ने खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के खिलाफ पूरे राज्य में आंदोलन का ऐलान किया है।
भाकपा (माले) राज्य कार्यालय में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में वामदलों के नेताओं ने आंदोलन की घोषणा की। वामदलों ने तय किया है कि 25 से 31 अगस्त के बीच झारखंड के सभी जिलों के प्रखंडों, पंचायतों और नगर निकायों में संयुक्त रूप से विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया जाएगा। गांवों गांवों तक प्रचार प्रसार एवं सार्वजनिक स्थानों पर नुक्कड़ सभाएं आयोजित की जाएंगी। राजधानी रांची में लोकभवन के समक्ष प्रदर्शन कर राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा जाएगा।
आंदोलन के अगले चरण में अन्य धर्मनिरपेक्ष पार्टियों और जनसंगठनों को साथ लेकर केंद्र सरकार के प्रतिष्ठानों का घेराव किया जाएगा तथा झारखंड बंद की घोषणा की जाएगी। वामदलों ने कहा कि संसद के दोनों सदनों में बिना पर्याप्त चर्चा के जबरन पारित कराए गए इस विधेयक के जरिए मोदी सरकार ने राज्यों के अधिकारों एवं संघीय ढांचा पर बड़ा हमला किया है।
इस विधेयक के कानून बनने से झारखंड जैसे खनिज बहुल राज्य को प्रतिवर्ष करीब 13 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। इससे सामाजिक सुरक्षा की कई योजनाओं के संचालन के लिए राशि की कमी हो सकती है और उनका संचालन प्रभावित हो सकता है। छात्रवृत्ति, मंईयां सम्मान योजना सहित कई जनकल्याणकारी योजनाएं भी प्रभावित होंगी।
वामदलों ने कहा कि खनिज संपदा पर राज्यों के अधिकारों को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाकपा (माले) के राज्य सचिव मनोज भक्त, भाकपा के राज्य सचिव महेंद्र पाठक,माकपा के राज्य सचिव प्रकाश विप्लव और एसयूसीआई (सी) के मिंटू पासवान एटक अशोक यादव से सहित अन्य नेता उपस्थित थे।
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