नागपुर , जुलाई 18 -- शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख एवं महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शनिवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल से निपटने के तरीके को लेकर केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा हमला बोला।

पार्टी के 'राम रक्षा' आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए नागपुर हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद श्री ठाकरे ने संवाददाताओं से कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि "धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगे जाने से पहले और कितनी जानें जायेंगी।"उन्होंने कहा, "मैंने यह पहले भी कहा है कि भारतीय जनता पार्टी और प्रशासन के बीच अब कोई तालमेल नहीं रह गया है। युवाओं के भविष्य के साथ जिस बेरहमी और क्रूरता से खिलवाड़ किया जा रहा है, वह बेहद शर्मनाक है। यदि सरकार सच में श्री सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित थी, तो उसे उन्हें बहुत पहले ही बातचीत के लिए बुलाना चाहिए था। इसके बजाय उन्हें जबरन अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया।".श्री ठाकरे ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार नीट परीक्षा को ठीक से आयोजित करने और उसके बाद हुए आंदोलन को संभालने, दोनों में ही विफल रही है। उन्होंने कहा, "धर्मेंद्र प्रधान में ऐसी क्या खास बात है कि इतनी बड़ी चूकों के बावजूद अभी तक उनका इस्तीफा नहीं मांगा जा रहा है? नीट पेपर लीक की वजह से कई छात्रों ने आत्महत्या कर ली। अब श्री वांगचुक को भी अपनी जान दांव पर लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। हमें रिपोर्टें मिल रही हैं कि छात्र भी उनके उपवास में शामिल हो रहे हैं, फिर भी सरकार जागने का नाम नहीं ले रही है।"श्री ठाकरे ने दावा किया कि भाजपा श्री वांगचुक को निशाना बनाकर अयोध्या राम मंदिर को मिले दान में हुई कथित अनियमितताओं के अभियान से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने मांग की कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं को लेकर इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि नीट पेपर लीक के कारण कई छात्रों ने आत्महत्या की थी।

उन्होंने कहा कि श्री वांगचुक ने प्रभावित छात्रों के लिए न्याय की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू की थी, लेकिन बातचीत शुरू करने के बजाय सरकार ने उन्हें जबरन अस्पताल में भर्ती करा दिया।

शिवसेना (यूबीटी) नेता ने यह भी आरोप लगाया कि श्री वांगचुक के खिलाफ यह कार्रवाई नागपुर में पार्टी के 'राम रक्षा' आंदोलन से जनता का ध्यान भटकाने के उद्देश्य से की गयी थी, जिसे उन्होंने भारी जनसमर्थन मिलने का दावा किया। साथ ही, उन्होंने इसे अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी से जुड़े विवाद से भी ध्यान हटाने की कोशिश बताया।

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