जयपुर , मार्च 14 -- राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की रिहाई पर खुशी जाहिर करते हुए कहा है कि यह पूरा मामला केंद्र की मोदी सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

श्री गहलाेत ने शनिवार को 'एक्स' पर कहा कि उनकी रिहाई का समाचार सुखद है, लेकिन यह कैसी विडंबना है, जो सोनम वांगचुक कभी श्री मोदी की नीतियों के समर्थक रहे, जब उन्होंने लद्दाख के हक और पर्यावरण की आवाज उठायी, तो उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) जैसी कठोर धाराओं में बांधकर जोधपुर जेल भेज दिया गया।

उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति को कुछ महीने पहले 'देश की सुरक्षा के लिए खतरा' बताकर जेल की सलाखों के पीछे डाला गया, उन्हें आज अचानक रिहा करने की बात आयी यानी उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिले। ऐसे में उनकी हिरासत के 170 दिनों का हिसाब कौन देगा। उन्हें गिरफ्तार क्यों किया गया था।

श्री गहलोत ने कहा कि क्या राष्ट्रीय सुरक्षा की परिभाषा अब भाजपा के राजनीतिक नफा-नुकसान से तय होगी। तानाशाही प्रवृत्ति से कानूनों का ऐसा 'सुविधाजनक इस्तेमाल' न केवल निंदनीय है, बल्कि हमारी लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी गहरा आघात है। देश की जनता इस दोहरे मापदंड को देख रही है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित