नयी दिल्ली , जून 15 -- पेट्रोलियम आयात खर्च में 54 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी के कारण मई में वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर 28.21 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, मई में कुल 73.41 अरब डॉलर का माल आयात किया गया जबकि निर्यात 45.20 अरब डॉलर रहा। इस प्रकार, कुल वस्तु व्यापार घाटा 28.21 अरब डॉलर रहा।
पिछले साल मई में 60.86 अरब डॉलर के आयात और 38.30 अरब डॉलर के आयात के साथ वस्तु व्यापार घाटा 22.56 अरब डॉलर रहा था।
मई में सेवाओं का अनुमानित निर्यात 36.76 अरब डॉलर और आयात 19.06 अरब डॉलर रहा। एक साल पहले ये क्रमशः 32.46 अरब डॉलर और 16.70 अरब डॉलर पर रहे थे।
इस प्रकार सेवाओं सहित कुल आयात 92.47 अरब डॉलर और निर्यात 81.96 अरब डॉलर रहा। भुगतान संतुलन में नुकसान बढ़कर 10.51 अरब डॉलर पर पहुंच गया। एक साल पहले यह 6.79 अरब डॉलर रहा था।
बढ़ते व्यापार घाटे का मुख्य कारण पेट्रोलियम आयात के खर्च में भारी-भरकम वृद्धि है। इस साल मई में 22.68 अरब डॉलर का पेट्रोलियम आयात किया गया। यह मई 2025 के 14.75 अरब डॉलर से 53.8 प्रतिशत अधिक है।
इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का आयात बिल 35.49 प्रतिशत बढ़कर 12.32 अरब डॉलर पर और सोने का आयात बिल 33.97 प्रतिशत बढ़कर 3.42 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीने में वस्तु आयात पिछले साल की समान अवधि के 126.24 अरब डॉलर से बढ़कर 145.35 अरब डॉलर पर और निर्यात 76.59 अरब डॉलर से बढ़कर 88.91 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
पेट्रोलियम और गहने जवाहरात को छोड़कर कुल आयात मई 2025 के 41.44 अरब डॉलर से बढ़कर मई 2026 में 46.09 अरब डॉलर पर रहा। वहीं, कुल निर्यात 30.49 अरब डॉलर से बढ़कर 34.24 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
मई में जिन पांच देशों से सबसे ज्यादा आयात हुआ उनमें चीन से आयात सालाना 23.4 प्रतिशत बढ़कर 12.73 अरब डॉलर, रूस से 63.5 प्रतिशत बढ़कर 9.48 अरब डॉलर, अमेरिका से 54.4 प्रतिशत बढ़कर 5.87 अरब डॉलर और सऊदी अरब से 12.5 प्रतिशत बढ़कर 2.12 अरब डॉलर रहा। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात से आयात 10.2 फीसदी घटकर 5.71 अरब डॉलर दर्ज किया गया।
मई में जिन पांच देशों को सबसे ज्यादा निर्यात किया गया उनमें अमेरिका को निर्यात 0.1 फीसदी घटकर 8.82 अरब डॉलर और नीदरलैंड को 18.4 प्रतिशत घटकर 1.67 अरब डॉलर रह गया। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात को निर्यात सालाना 3.2 प्रतिशत बढ़कर 3.07 अरब डॉलर, सिंगापुर को 69 प्रतिशत बढ़कर 1.90 अरब डॉलर और चीन को 24.8 प्रतिशत बढ़कर 2.02 अरब डॉलर रहा।
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